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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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२२० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास मालवे में मरहटों का सबसे पहला आक्रमण वि० सं० १७५६^१ ( ई० स० १६६६ ) में बादशाह औरंगज़ेब की विद्यमानता में हुआ था, पर वह मरहटों का उत्थान आक्रमण केवल शाही इलाके में लूट-मारकर दक्षिण से बादशाह का ध्यान हटाने के लिए ही था । औरंगज़ेब के जीवन-काल में दक्षिण में मरहटों के साथ की लड़ाइयां जारी रहीं और उसकी मृत्यु के साथ ही उनमें कमी आ गई। पच्चीस वर्ष से दोनों दल निरन्तर युद्ध कर रहे थे। अब उनका थक जाना स्वाभाविक था। उन दिनों मरहटों में भी कुछ गृह-कलह उत्पन्न हो गया, पर वे शीघ्र ही चेत गये। इसके विपरीत मुग़ल साम्राज्य में ऐसी शिथिलता उत्पन्न हुई कि मुग़ल अपनी सत्ता को सुदृढ़ न कर सके। छत्रपति शिवाजी ने भारत में पुनः जिस हिन्दू- साम्राज्य की नींव डाली थी, उसको दृढ़ करने का वह उपयुक्त समय था; क्योंकि उन दिनों शिवाजी के संस्थापित सतारा राज्य के स्वामी शाहू का मंत्री पेशवा बाजीराव^२ बल्लाल योग्य व्यक्ति था। उसके समय में राजा शाहू (१) डॉ० रघुवीरसिंह; मालवा में युगांतर; पृ० ६०-१। यह आक्रमण मर- हटों के एक सेनापति कृष्णाजी सावंत ने किया था । उसके साथ उस समय पन्द्रह हज़ार सवार थे और नर्मदा नदी पारकर वह धामुनी इलाक़े में लूट मारकर वापिस चला गया। (२) पेशवा जाति के ब्राह्मण थे । औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद शाहज़ादे आज़मशाह ने मरहटा राजा शंभा के पुत्र शाहू को क़ैद से छोड़ दिया। फिर उसने सेना एकत्र कर सतारा पर अधिकार किया । तदनन्तर शाहू ने वि० सं० १७७१ ( ई० स० १७१४ ) में बालाजी विश्वनाथ को पेशवा (प्रधान) का पद दिया । उस- (बालाजी ) ने राजा शाहू के समय अपने अधिकारों को बढ़ा लिया । वि० सं० १७७७ ( ई० स० १७२० ) में बालाजी की मृत्यु हुई और उसका पुत्र बाजीराव बल्लाल पेशवा बना, जिसने मरहटों का प्रभाव उत्तरी भारत में फैलाकर मालवा पर अधिकार किया और राजपूताना तथा मुग़ल साम्राज्य पर मरहटों का आतंक स्थापित कर दिया। वि० सं० १७६७ वैशाख सुदि १ ( ई० स० १७४० ता० १६ अप्रेल ) को बाजीराव का देहांत होने पर उसका पुत्र बालाजी बाजीराव पेशवा बना, जिसने राजा शाहू के मरने पर (जब रामराजा का पुत्र शिवाजी (दूसरा) कोल्हापुर से गोद आकर सतारा राज्य का स्वामी बना) पूना में रहना स्थिर कर पृथक् राज्य की सृष्टि की और सतारा