राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास उदयपुर से पेशवा जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह के पास गया । उस समय उसके साथ प्रतापगढ़ का महारावत गोपालसिंह भी था । ता० ३ शव्वाल हि० स० ११४८ ( फाल्गुन सुदि ४ = ता० ५ फ़रवरी ) को पेशवा ने महारावत को रुख़्सत देकर ख़ासा अस्तबल से आभूषण- सहित घोड़े महाराणा के लिए उसके साथ रवाना किये १ । जोधपुर के महाराजा अभयसिंह ने बीकानेर के महाराजा जोरावर- सिंह के समय वि० सं० १७६७ ( ई० स० १७४० ) में बड़ी सेना के साथ बीकानेर पर चढ़ाई कर चारों तरफ़ से राजधानी एवं दुर्ग को घेर लिया । महाराजा जोरावरसिंह ने बहुत दिनों तक जोधपुर की सेना का सामना किया, परंतु जोधपुर की बड़ी सेना के आगे वह छुटकारा न पा सका । अन्त में नागोर के स्वामी राजाधिराज बख्तसिंह (अभयसिंह का छोटा भाई ) की सम्मति के अनुसार जोरावरसिंह ने जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह के पास अपने आदमी भेज सहायता के लिए कहलाया । जयसिंह ने अभयसिंह को बीकानेर से घेरा उठाने के लिए कहलाया, परंतु जब उसने वहां से घेरा उठाना स्वीकार न किया तो उस (जयसिंह)- ने विशाल सेना के साथ जोधपुर की ओर प्रयाण किया एवं उदयपुर के महाराणा जगतसिंह (दूसरा ) को भी सेना लेकर आने के लिए लिखा । सवाई जयसिंह के लेखानुसार महाराणा ने सलूंबर के रावत केसरीसिंह को कुछ सेना के साथ तत्काल ही भेज दिया २ और पीछे से वह स्वयं भी पुष्कर-यात्रा के बहाने अपनी सेना के साथ महाराजा जयसिंह को जोधपुर के घेरे में सहायता पहुंचाने के निमित्त रवाना हुआ ३ और उसके साथ कोटा से महाराव दुर्जनसाल, डूंगरपुर से महारावल शिवसिंह तथा प्रतापगढ़ से
[हाशिया / पार्श्व-टिप्पणी:] महारावत का महाराणा के साथ सवाई जयसिंह की सहायतार्थ जाना
[पाद-टिप्पणियाँ:] ( १ ) सिलेक्शन्स फ़्रॉम पेशवाज़ दफ़्तर; जि० ३, पृ० ३२१, सं० ३२१ । ( २ ) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० १२२४ । ( ३ ) वही; द्वितीय भाग, पृ० १२२४ । "वंशभास्कर" ( चतुर्थ भाग, पृ० ३२६६ ) में महाराणा के साथ ८०००० सेना होना बतलाया है ।