राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत सामन्तसिंह २६७ करा और उसपर अपनी मुहर तथा हस्ताक्षर करके उस(रामचन्द्र भाऊ)- को इसलिए दिया है कि वह उसे देवलिया-प्रतापगढ़ के राजा के पास भेज दे और रामचन्द्र भाऊ ने उसकी एक नक़ल अपने दस्तख़त तथा मुहर के साथ उक्त कप्तान को दी है। कप्तान कॉलफ़ील्ड इक़रार करता है कि माननीय गवर्नर जेनरल के तस्दीक़ किये हुए अहदनामे की एक प्रति, जो उस अहदनामे की जिसे अभी उसने स्वयं तैयार किया है अक्षरशः नक़ल होगी, दो महीने के अरसे में रामचंद्र भाऊ को इसलिए दी जायगी कि वह उसे देवलिया प्रतापगढ़ के राजा सामंतसिंह को दे और राजा को वह प्रति सौंप दी जाने पर ब्रिगेडियर-जेनरल सर जॉन माल्कम, के० सी० बी०, के० एल० एस०, की आज्ञा से कप्तान कॉलफ़ील्ड-द्वारा तैयार किया हुआ अहदनामा लौटा दिया जायगा। इसी प्रकार रामचंद्र भाऊ प्रतिज्ञा करता है कि उक्त अहदनामे की दूसरी प्रति, जिसपर देवलिया प्रतापगढ़ के राजा सामन्तसिंह का हस्ताक्षर होगा और जो उस अहदनामे की, जिसको रामचंद्र भाऊ ने स्वयं तैयार किया है, अक्षरशः नक़ल होगी, आज की तारीख़ से आठ दिन के अरसे में कप्तान काल्फ़ील्ड को दी जायगी, ताकि वह उसको माननीय गवर्नर जेनरल के सुपुर्द कर दे। ऐसा होने पर वह अहदनामा, जिसे रामचंद्र भाऊ ने, जैसा कि ऊपर लिखा जा चुका है अपने प्राप्त किये हुए अधिकार के अनुसार तैयार किया है, वापस कर दिया जायगा। आज ५ वीं अक्टोबर ई० स० १८१८ ता० ४ ज़िलहिज हि० स० १२३३ तदनुसार आसोज सुदि ६ वि० सं० १८७५ को तैयार हुआ। (दस्तखत) हेस्टिंग्ज़ ,, जी० डॉड्सवेल ,, जे० स्टूअर्ट ,, सी० एम० रिकेट्स आज ७ वीं नवम्बर ई० स० १८१८ (वि० सं० १८७५ कार्तिक सुदि १०) को फ़ोर्ट विलियम (कलकत्ता) में हिज़ एक्सेलेंसी मोस्ट नोबल