भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 330, कुल 534 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 330

: महारावत सामन्तसिंह २७३ महारावत सामंतसिंह के पिछले समय में राज्य का काम शाह नवल- चंद करता था। वह होशियार और पूरा स्वामिभक्त था, अतएव महारावत महारावत का नवलचंद पाड-लिया को कामदार बनाना ने कुंवर दीपसिंह के अंग्रेज़ सरकार-द्वारा अचरे की गढ़ी में भेज दिये जाने पर वि० सं० १८८० पौष सुदि ३ (ई० स० १८२४ ता० ४ जनवरी) रविवार को फिर शाह नवलचंद को कामदार (मुख्य मंत्री) के पद पर नियत किया। दीपसिंह की मृत्यु के पश्चात् महारावत ने अपने ज्येष्ठ पौत्र केसरीसिंह को राज्य-कार्य सौंप दिया। उस (केसरीसिंह) ने भी शाह नवलचंद की पूरी तसल्ली कर उसको उसी पद पर बहाल रखा। उसकी कार्य-शैली अच्छी होने से अंग्रेज़ सरकार के पोलिटिकल अफ़सरों ने भी समय-समय पर उसकी खातिरी कर उसको उत्साहित किया था¹। महारावत के कुंवर दीपसिंह के एक पुत्री प्रतापकुंवरी थी। उसका संबंध बीकानेर के महाराजा रतनसिंह के महाराजकुमार सरदारसिंह के महारावत की पौत्री का बीकानेर के कुंवर सरदारसिंह से विवाह साथ निश्चय होकर वि० सं० १८८६ फाल्गुन वदि ८ (ई० स० १८३३ ता० १२ फ़रवरी) विवाह की तिथि स्थिर हुई²। तदनुसार उक्त महाराजकुमार की बरात प्रतापगढ़ पहुंचने पर पूर्ण आतिथ्य कर महारावत ने बड़े समारोह के साथ विवाह-कार्य सम्पन्न किया। पुत्र शोक का घाव भर भी नहीं पाया था कि ऐसे में वि० सं० १८६१ वैशाख सुदि ४ (ई० स० १८३४ ता० १२ मई) को महारावत के दिन ता० २१ अप्रेल आती है। अतएव दीपसिंह की मृत्यु की कौनसी तिथि सही है, इस सम्बन्ध में निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता; परन्तु गैज़ेटियर आदि में दी हुई तारीख़ ही सही होनी चाहिये, क्योंकि वह तत्कालीन सरकारी काग़ज-पत्रों के आधार पर लिखे गये हैं। (१) शाह नवलचन्द के नाम विलियम बोरथिक का वि० सं० १८८६ ज्येष्ठ वदि ६ (ई० स० १८३२ ता० १६ मई) का ख़त। (२) मेरा बीकानेर राज्य का इतिहास; भाग २, पृ० ४२०। ३५