राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८८ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास सेना के साथ रवाना हुआ। मार्ग में उसने डूंगला गांव में बाग़ियों से घिरे हुए चालीस अंग्रेज़, जिनमें औरतें और बच्चे आदि भी शामिल थे, छुड़वा- कर उदयपुर पहुंचाये। तदनंतर वह नीमच पहुंचा और वहां पुनः अधिकार कर छावनी का प्रबन्ध कप्तान लॉयड को सौंपकर स्वयं बाग़ियों के पीछे रवाना हुआ१। उस समय कप्तान लॉयड के पास छावनी की रक्षा के लिए सैनिकों की पूर्ण आवश्यकता थी, अतएव उसने महारा- वत दलपतसिंह से भी सेना भेजने की दर्खास्त की। इसपर महारावत ने कप्तान लॉयड के पास अपने यहां से सेना भेज दी, जिसने नीमच की रक्षा का अच्छा प्रबंध किया। फिर वहां अंग्रेज़ी सेना पहुंच जाने पर कप्तान लॉयड ने महारावत की सेना को सीख दी। इस सेवा के सम्बन्ध में मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट कप्तान शावर्स ने वि० सं० १६१४ श्रावण सुदि २ (ई० स० १८५७ ता० २३ जुलाई) को महारावत के नाम शुक्रगुज़ारी का खरीता भेजा, जिसका सारांश नीचे लिखे अनुसार है- ".........आपने नीमच के सुपरिन्टेन्डेन्ट कप्तान लॉयड की दर्स्वा- स्त पर अंग्रेज़ सरकार की मित्रता का ध्यान रखते हुए नीमच की छावनी की रक्षार्थ सवार और पैदल भेजे। उन्होंने सरकार की इच्छा के अनुसार बड़े यत्न और होशियारी के साथ काम किया, जिसके लिये हम अनुगृहीत हैं। हम उनकी सेवा से बहुत प्रसन्न रहे। अब सरकारी सेना नीमच की छावनी में आ गई है, इसलिए वहां की सेना को कष्ट देना उचित न समझ- कर विदा करता हूं२।"......... उन्हीं दिनों फ़ीरोज़ नामक एक हाजी अपने को दिल्ली के मुग़ल वंश का शाहज़ादा बतलाकर मंदसोर के पास कचरोद गांव (खाचरोद, ग्वा- लियर राज्य) में पहुंचा और वहां के निवासियों को बहकाकर उसने उपद्रव खड़ा कर दिया, जिसपर मंदसोर के सूबेदार ने उसको वहां से भगा दिया। (१) शॉवर्स; ए मिसिंग चैप्टर ऑव इंडियन म्युटिनी; पृ० ८-३२। (२) महारावत दलपतसिंह के नाम मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट कप्तान शावर्स का हिन्दी खरीता।