राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत दलपतसिंह २६१ इस ख़ैरख्वाही की सूचना सदर को कर रहा हूं। साहेब आलीशान आपकी इस मित्रता से बहुत प्रसन्न होंगे'।" क़ासिमख़ां विलायती आदि बाग़ी दल के लोगों के महारावत-द्वारा मारे जाने की रिपोर्ट मालवा तथा सेंट्रल इंडिया के एजेंट गवर्नर-जेनरल-द्वारा भारत के तत्कालीन गवर्नर जेनरल (बड़े लाट) लॉर्ड कैनिङ्ग के पास पेश होने पर उसको बड़ा संतोष हुआ और उसने राजपूताना के एजेंट गवर्नर जेनरल को महारावत के नाम प्रसन्नता-सूचक पत्र भेजने को लिखा। इसपर राजपूताना के एजेंट गवर्नर-जेनरल कर्नल जॉर्ज लारेंस ने वि० सं० १६१५ चैत्र सुदि ६ (ई० स० १८५८ ता० २० मार्च) को महारावत के नाम निम्न- लिखित आशय का खरीता भेजा— "....इन दिनों एजेंट गवर्नर-जेनरल, सेंट्रल इंडिया तथा पोलिटिकल एजेंट, मेवाड़ की तरफ़ से यह रिपोर्ट हुई है कि आपने स्वयं और सेना को साथ में रखकर कर्नल ड्यूरेंड एवं सरकारी सेना को मंदसोर के फ़सादियों को सज़ा देने में यथेष्ट सहायता दी है। आपकी इस ख़ैरख्वाही और उत्तम मित्रता से नब्वाब गवर्नर जेनरल अत्यन्त प्रसन्न हुए तथा मुझको यह आज्ञा मिली है कि उनकी ओर से खुशनूदी मिज़ाज की सूचना दूं और इस ख़त के ज़रिये आपकी सहानुभूति का धन्यवाद करूं२।..." झांसी, सतारा आदि राज्यों के उत्तराधिकारी के अभाव में लॉर्ड डलहौज़ी-द्वारा ज़ब्त हो जाने के कारण कई मरहटे सरदार भी अंग्रेज़ सर- कार से असंतुष्ट थे और भारत में पुनः मरहटा साम्राज्य स्थापित करने का स्वप्न देख रहे थे। इस अवसर से लाभ उठाने के लिए कुछ मरहटे सरदारों ने भी विद्रोह पर कमर बांधी और पेशवा के वंशज राव साहब (१) जॉर्ज लारेंस, एजेंट गवर्नर जेनरल, राजपूताना का महारावत दलपतसिंह के नाम का खरीता। (२) राजपूताने के एजेंट गवर्नर कर्नल जॉर्ज लारेंस के उर्दू खरीते का आशय।