राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 351, कुल 534 में से
संदर्भ में पढ़ेंवाग़ियों का एक दल प्रतापगढ़ की ओर गया । उस समय महारावत स्वयं अपने राजपूतों को साथ लेकर उनके मुक़ाबले के लिए आगे बढ़ा। बागी दल का मुखिया क़ासिमख़ां विलायती अपने ८० आदमियों-सहित मारा गया। कर्नल ड्यरेंड की अधीन सेना को रसद-सामग्री भिजवाने आदि का भी महारावत ने यथेष्ट प्रबंध किया था और बागी दल के मुखिया का मस्तक काटकर महारावत ने कर्नल ड्यूरेंड के पास भेजा। महारावत की इस सेवा से अंग्रेज़ अफ़सरों तथा कर्नल ड्यूरेंड को बड़ी प्रसन्नता हुई और उसने ता० १ दिसंबर (मार्गशीर्ष सुदि १५) मंगलवार को कप्तान शॉवर्स पोलिटिकल एजेंट, मेवाड़ के पास नीचे लिखी सूचना भेजी— “...मैंने प्रतापगढ़ के स्वामी के मोतमिद को एक पत्र दिया है और आपको लिखता हूं कि मैं प्रतापगढ़ के राजा से बहुत प्रसन्न हूं, क्योंकि उन्होंने सेना के लिए रसद (सामान) अच्छी तरह से भिजवाई और अराजकों को सज़ा देने में पूर्ण प्रयत्न किया। वे उन (वागियों) के सरदार को गिरफ़्तार कर भेजते, किन्तु मुक़ाबला करने से उन्होंने उसको मारा और उस (मुखिया) का सिर मेरे पास आया है¹।...” पोलिटिकल एजेंट मेवाड़ द्वारा यह सम्वाद कर्नल जॉर्ज लॉरेंस (स्थानापन्न एजेंट गवर्नर-जेनरल, राजपूताना) को मिलने पर उसने ई० स० १८५८ ता० ५ फ़रवरी (वि० सं० १९१४ फाल्गुन वदि ७) को महारावत के नाम नीचे लिखे आशय का ख़रीता भेज प्रसन्नता प्रकट की— “....इन दिनों मुझको मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट के पत्र से मालूम हुआ है कि आपने सरकारी आदमियों को सहायता देने में बहुत प्रयत्न किया है और कर्नल ड्यूरेंड एजेंट गर्वनर जेनरल, सेंट्रल इंडिया के साथ रहनेवाली सेना को आवश्यक रसद सामग्री पहुंचाने में पूरी सहायता दी है। यह ख़बर सुनकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई और जैसी ख़ैरख्वाही की सरकार को आपसे आशा थी, वैसी प्रकट हुई। अब मैं आपकी (१) मध्यभारत के एजेंट गवर्नर जेनरल कर्नल ड्यूरेंड के पोलिटिकल एजेंट मेवाड़ के नाम के अंग्रेज़ी ख़त का आशय ।