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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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पृष्ठ 367

३०२ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास है, उसका पूरा लिहाज़ रखें १ ।" उन दिनों महारावत की प्रवृत्ति कुछ ऐयाशी की ओर बढ़ने लगी थी, जिससे शासन-प्रबंध में अव्यवस्था होने लगी। इसपर पोलिटिकल शासन-व्यवस्था में गड़बड़ी होना | एजेंट मेवाड़ ने प्रतापगढ़ के वकील को, जो उसके पास नियत था, महारावत को समझाने के लिए भेजा, जिसका महारावत पर अच्छा प्रभाव पड़ा और उसने फिर रियासत के कार्य में ध्यान देना आरंभ किया तथा फिर रतलाम से कामदार के पद पर ओंकारलाल व्यास को बुलाकर नियत किया २ । तदनन्तर महारावत ने अपने राज्य की न्याय-व्यवस्था ठीक करने के लिए दीवानी तथा फ़ौजदारी अदालतें स्थापित कीं, परंतु अपराधियों के अंग्रेज़ सरकार से अपराधियों के देन-लेन का इक़रारनामा होना | देन-लेन के विषय में क़ौल-क़रार न होने से उनकी गिरफ़्तारी में बाधाएं उपस्थित होती थीं। अतएव वि० सं० १९२५ (ई० स० १८६८) में महारावत और अंग्रेज़ सरकार के बीच कर्नल हचिन्सन, पोलिटिकल एजेंट, मेवाड़ के द्वारा नीचे लिखा अहदनामा हुआ— अपराधियों को एक दूसरे को सौंपने के सम्बन्ध में अंग्रेज़ सरकार तथा देवलिया प्रतापगढ़ के राजा हिज़ हाइनेस उदयसिंह, उनके बाल-बच्चों, वारिसों तथा और उत्तराधिकारियों के बीच का अहदनामा, जिसको एक तरफ़ लेफ़्टेनेंट-कर्नल अलेक्ज़ेंडर रॉस इलियट हचिन्सन, स्थानापन्न पोलि- टिकल एजेन्ट, मेवाड़ ने लेफ़्टेनेंट कर्नल रिचर्ड हार्ट कीटिङ्ग, सी० एस० आई० तथा वी० सी० एजेंट गवर्नर-जेनरल राजपूताना के आदेश से, जिसे हिंदुस्तान के वाइसरॉय और गवर्नर-जेनरल दि राइट आनुरेवल सर जॉन लॉर्ड मेयर लारेंस वैरोनेट, जी० सी० वी० एवं जी० सी० एस० आई० से तत्सम्बन्धी पूर्ण अधिकार प्राप्त हुए थे और दूसरी तरफ़ राजा उदयसिंह ने तैयार किया— ( १ ) ज्वालासहाय; वक़ाये राजपूताना; जि० १, पृ० ५६०-१ । ( २ ) वही; जि० १, पृ० ५४६ ।