राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 368, कुल 534 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहारावत उदयसिंह ३०३ शर्त पहली—कोई व्यक्ति चाहे वह अंग्रेज़ी इलाक़े की प्रजा हो, या किसी और की, अंग्रेज़ी इलाक़े में कोई संगीन जुर्म करे और प्रतापगढ़ राज्य की सीमा के भीतर पनाह ले तो प्रतापगढ़ राज्य उसको गिरफ़्तार करेगा और तलब किये जाने पर साधारण नियम के अनुसार अंग्रेज़ सरकार को सौंप देगा। शर्त दूसरी—कोई व्यक्ति जो प्रतापगढ़ की प्रजा हो, प्रतापगढ़ राज्य की सीमा के भीतर कोई भारी अपराध कर अंग्रेज़ी इलाक़े में शरण ले तो अंग्रेज़ सरकार उसको गिरफ़्तार करेगी और तलब करने पर रीति के अनुसार प्रतापगढ़ राज्य को सौंप देगी। शर्त तीसरी—कोई आदमी, जो प्रतापगढ़ की प्रजा न हो, प्रतापगढ़ राज्य की सीमा के भीतर कोई बड़ा अपराध कर अंग्रेज़ी इलाक़े में आश्रय ले तो वह गिरफ़्तार किया जायगा और उसके मुक़दमे का फ़ैसला वह अदालत करेगी, जिसको अंग्रेज़ सरकार आज्ञा दे। साधारण नियम के अनुसार ऐसे मुक़दमों का निर्णय उस पोलिटिकल एजेंट के इजलास में होगा, जिसके साथ प्रतापगढ़ राज्य का सम्बन्ध हो। शर्त चौथी—किसी भी अवस्था में कोई सरकार किसी व्यक्ति को, जिसपर किसी बड़े अपराध का अभियोग लगाया गया हो, तब तक सौंपने की पाबन्द न होगी, जब तक कि वह सरकार, जिसके इलाक़े में अपराध हुआ हो, अभियुक्त को क़ायदे के अनुसार तलब न करे और जुर्म की ऐसी शहादत पेश न हो, जिसके द्वारा जिस इलाक़े में वह (अपराधी) पाया जाय, उसके क़ानून के अनुसार उसकी गिरफ़्तारी वाजिब समझी जाय और यदि वही अपराध उस इलाक़े में किया जाता तो वहां भी अभियुक्त अपराधी ठहराया जाता। शर्त पांचवीं—नीचे लिखे हुए अपराध संगीन अपराध समझे जायेंगे— ( १ ) मनुष्य वध ( ४ ) ठगी ( २ ) मनुष्य वध करने का प्रयत्न ( ५ ) विष-प्रयोग ( ३ ) उत्तेजना की दशा में किया ( ६ ) बलात्कार हुआ दंडनीय मनुष्य वध ( ७ ) सख्त चोट पहुंचाना