भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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३०४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास ( ८ ) बालक चुराना ( १६ ) जाली सिक्के बनाना तथा खोटे ( ६. ) औरतों को बेचना सिक्के चलाना ( १० ) डाका डालना ( १७ ) दंडनीय विश्वासघात ( ११ ) लूट करना ( १८ ) माल-अस्बाब राखन ( हजम ) ( १२ ) सेंध लगाना करना, जो जुर्म समझा जाय ( १३ ) पशुओं की चोरी ( १६ ) ऊपर लिखे हुए अपराधों में ( १४ ) मकान जलाना सहायता देना ( १५ ) जालसाज़ी शर्त छठी—ऊपर लिखी हुई शर्तों के अनुसार किसी अपराधी को गिरफ़्तार करने, रोक रखने या सुपुर्द करने में जो व्यय पड़ेगा, वह उस सरकार को देना पड़ेगा, जो उसको तलब करेगी । शर्त सातवीं—ऊपर लिखा हुआ अहदनामा तब तक क़ायम रहेगा, जब तक अहदनामा करनेवाले दोनों पक्षों में से कोई उसको तोड़ने की अपनी इच्छा दूसरे को न बतलावे । शर्त आठवीं—इस अहदनामे में जो शर्तें दी गई हैं, उनमें से किसी का भी असर ऐसे किसी अहदनामे पर न होगा, जो दोनों पक्षों के बीच पहले हुआ है, सिवाय किसी अहदनामे के उस अंश के जो इसके विरुद्ध हो । आज २२वीं दिसंबर ई० स० १८६८ (वि० सं० १६२५ पौष सुदि ८) को प्रतापगढ़ में तय हुआ । ( दस्तख़त ) ए० आर० ई० हर्चिसन् | मुहर | लेफ़्टेनेंट-कर्नल, स्थानापन्न पोलिटिकल एजेंट मेवाड़ । | मुहर | प्रतापगढ़ देवलिया के राजा की मुहर तथा दस्तख़त । ( दस्तख़त ) मेयो, भारत का वाइसरॉय और गवर्नर-जेनरल ।