भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 366, कुल 534 में से

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पृष्ठ 366

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महारावत उदयसिंह ३०१ इस मुल्क के लिए प्रचुर अनाज मंगवाने का प्रयत्न किया जावे । यह आज्ञा दी जाती है कि तमाम जांगीरदार, अहलकार, पटेल, पटवारी आदि निम्नलिखित बातों की तामील करें तथा जब तक ज़माना ठीक न हो, यहां के निवासियों और बाहर के मनुष्यों को कष्ट न पहुंचावें— ( १ ) श्रावण सुदि १५ तक अनाज की निकासी तथा रवानगी पर महसूल माफ़ किया जाता है । ( २ ) जो परदेशी परिश्रम कर सकते हों वे इमारती कार्य में लगाये जावें, जैसे कुएं खुदवाना, तालाब बनवाना आदि ताकि मुसीबत के समय वे अपना निर्वाह कर सकें । ( ३ ) प्रतापगढ़ में राज्य का एक और साहूकारों के कई सदाव्रत हैं । उनके कार्य-कर्ताओं को सूचित किया जाता है कि मारवाड़ी तथा अन्य लोग जो खैरात मांगें, उनको पूरे तौर से अर्थात् प्रत्येक आदमी को सेर भर आटे से कम न दें । ( ४ ) अनाज को राज्य में लाकर एकत्रित करने की रोक नहीं है, तथापि इश्तिहार जारी किया जाता है कि अनाज के व्यापार पर किसी प्रकार का प्रतिबंध न होगा । इस मुल्क के समस्त व्यापारी अनाज अपने तौर पर ख़रीद कर बेचें । यही नहीं, उनको राज्य से सहायता भी दी जायगी । यदि कोई परदेशी सौदागर प्रतापगढ़ इलाक़े में ग़ल्ला लाना चाहे और रक्षा के लिए पहरा चाहे तो राज्य में सूचना करने पर पहरा मिल जावेगा । मार्ग रक्षित नहीं है, जिससे इस अकाल के समय सावधानी और निगरानी की आवश्यकता है । ( ५ ) जो पशु मारवाड़ तथा अन्य स्थानों से आये हुए हैं, वे पहाड़ के नज़दीक कटे हुए घास के बीड़ में बिना महसूल चरेंगे । यदि कोई शिकायत आवेगी कि किसी ने उनसे महसूल लिया है, तो महसूल लेने- वालों को सज़ा दी जावेगी । ( ६ ) रियासत के अहलकारों, जागीरदारों और मुत्सद्दियों को ज़रूरी है कि इस विषय में एजेंट गवर्नर-जनरल, राजपूताना ने जो इश्तिहार भेजा