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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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३०६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास को फ़ोर्ट विलियम में हिन्दुस्तान के वाइसरॉय और गवर्नर जेनरल ने इस अहदनामे को मंजूर कर इसकी तसदीक़ की १ । ( दस्तखत ) एच० एम्० ड्युरंड, सेक्रेटरी, भारत गवर्नमेंट, फ़ॉरेन विभाग। प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा राज्य की सीमाएं मिली हुई होने से कभी- कभी इन दोनों राज्यों के बीच सीमा संबंधी झगड़े और उपद्रव होकर [बांसवाड़ा राज्य के साथ सीमा] विरोध हो जाया करता था। उन दिनों (बांसवाड़ा के [संबंधी झगड़ा होना] महारावल लक्ष्मणसिंह के राज्य समय ) बांसवाड़ा- वालों ने प्रतापगढ़ राज्य के रायपुर ठिकाने के बोरी, रींछड़ी आदि गांवों का नवीन झगड़ा उठाया, जो प्रतापगढ़ राज्य के अधिकार में बहुत वर्षों से चले आते थे। इस झगड़े ने बड़ा भीषण रूप धारण किया और वि० सं० १६२३ आश्विन सुदि ६ ( ई०स० १८६६ ता० १४ अक्टूबर ) को रात्रि के समय बांसवाड़ावालों ने एक बड़ी सेना के साथ जाकर रायपुर के ठाकुर पर, जो उस समय वहां के थाने पर सीमा की रक्षा के लिए प्रतापगढ़ की तरफ़ से नियत था, आक्रमण कर दिया। रायपुर के ठाकुर और उसके साथी ( प्रतापगढ़ के सरदार ) उस समय असावधान थे, इसलिए बांसवाड़ावालों का आक्रमण वे सह न सके और उनके आदमियों में से आंधीरामा के ठाकुर का पुत्र केसरीसिंह, रायपुर का अजीतसिंह, हिम्मतसिंह, चौहान लक्ष्मणसिंह, हम्मीरसिंह आदि ३५ व्यक्ति मारे गये और ५६ घायल हुए तथा बांसवाड़ावाले वहां से कई हज़ार रुपयों का माल भी लूट ले गये। इस झगड़े में बांसवाड़ा राज्य के दो आदमी मारे गये और चार घायल हुए। फिर पोलिटिकल अफ़सरों- द्वारा इस मुक़द्दमे की तहक़ीक़ात होने पर बांसवाड़ा राज्य की ज़्यादती प्रमाणित हुई और बांसवाड़ा राज्य के कामदार कोठारी चिमनलाल पर एक हज़ार रुपये जुरमाना होकर वह दस वर्ष के लिए बांसवाड़ा राज्य से निर्वासित कर दिया गया एवं पांच दूसरे अह्लकार, जो इस झगड़े में ( १ ) एचिसन; ट्रीटीज़, एंगेजमेंट्स एण्ड सनद्ज़; जि० ३, पृ० ४६२ ।