राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished534 पृष्ठ
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महारावत उदयसिंह ३०६
महारावत का कामदार ओंकारलाल व्यास कारगुज़ार व्यक्ति था । वि० सं० १६३२ ( ई० स० १८७५ ) में उसको एक बदमाश सिपाही ने तल- [कामदार ओंकारलाल व्यास की मृत्यु] वार का प्रहार कर घायल कर दिया, जिससे वह कुछ दिनों पीछे मर गया । घातक उसी समय मार डाला गया और उसके शामिल रहनेवाले व्यक्तियों को क़ैद की सज़ा दी गई। महारावत ने उस ( ओंकारलाल ) के पुत्र कोम- लराम के प्रति सहानुभूति प्रकट कर उसको अपने यहां ही रक्खा और उससे राज्य का काम लेने लगे, किन्तु वस्तुतः राज्य का सब कार्य महारावत की आज्ञानुसार ही होता था¹ । प्रतापगढ़ राज्य की अधिकांश ज़मीन पैदावार के लिए बहुत ही उपयोगी है । वहां पहले अफ़ीम की काश्त अधिकता से होती थी, जो [महारावत का अपने राज्य की आबादी बढ़ाना] अच्छी ज़ात की होती थी एवं अनाज की पैदा- वारी भी अच्छी थी । महारावत के उदार विचार और प्रयत्न से वहां के ऊजड़ गांव फिर बस गये और काश्तकारों को रियायतें और तसल्ली देने से वहां की तमाम ज़मीन में खेती होने लगी तथा कृषि-योग्य भूमि में से कुछ भी खाली न बची । केवल एक गांव बांसवाड़ा के भीलों की ज़्यादती से वीरान था । बांस- वाड़ा के भील प्रतापगढ़ की प्रजा से चौथ लेने का दावा करते थे । ई० स० १८७३ ( वि० सं० १६३१ ) में मेवाड़ राज्य के धरियावद पट्टे की तरफ़ के गांगा की पाल के मीणों ने कप्तान चार्ल्स स्ट्रेटन पर हमला भी किया²; किंतु महारावत के अच्छे प्रबन्ध से प्रतापगढ़ राज्य के निवासी भील-मीणे
( १ ) ज्वालासहाय; वक़ाये राजपूताना; जि० १, पृ० ५६०, ५६२-४ । ओंकार- लाल व्यास जाति का औदीच्य ब्राह्मण था । उसने कई वर्षों तक रतलाम राज्य में काम किया था, जिससे उसको अच्छा अनुभव हो गया था । वि० सं० १६३२ वैशाख बदि ३ ( ई० स० १८७५ ता० २३ अप्रेल ) को महारावत ने उसको बांसलाही गांव प्रदान किया, जो अद्यावधि उसके वंशजों के पास विद्यमान है । ( २ ) वही; जि० १, पृ० ५६४ ।