राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत रघुनाथसिंह ३२५ से सूचित करना होगा और जो हुक्म महक्मा मौसूफ़ से उस बारे में दिया जावेगा उसकी तामील बखूबी करनी होगी। (२०) तुमको अपने ठिकाने की तरफ़ से एक वकील देवगढ़-प्रताप- गढ़ में हमेशा हाज़िर रखना होगा, जो तुम्हारे ठिकाने के ताल्लुक़ का कुल काम हर एक महक्मे और अदालत में हाज़िर रहकर किया करे। (२१) जो आज्ञाएं राजेश्वरी महक्मा ख़ास से समय-समय पर जारी होंगी या जो मुक़दमे श्रीदरबार की अदालतों से फ़ैसल होकर तामील के लिए तुम्हारे यहां भेजे जायेंगे, उनकी तुमको पूरी-पूरी तामील करनी होगी। उसी वर्ष महारावत ने अपने राज्य में स्टांप और कोर्ट फ़ीस के क़ायदे में संशोधन कर उसे जारी किया, जिससे ठिकानों में मनमानी बंद हो गई और ख़ालसे तथा ठिकानों में एक ही प्रकार के क़ायदे चालू हो गये। महारावत ने अपने कामदार पंडित मोहनलाल विष्णुलाल पंड्या का पूरा सम्मान किया। उसको गुरु की उपाधि, ताज़ीम का सम्मान और दो गांव भी प्रदान किये; किन्तु उसने थोड़े ही दिनों पारसी फ्रामजी भीकाजी को बाद महारावत की कृपा खो दी। फिर उस स्थान पुनः कामदार नियत करना पर पारसी फ़्रामजी भीकाजी नियत हुआ, जो पहले इस पद का कार्य कर चुका था। उन्हीं दिनों महारावत ने अपने पुराने कामदार मिर्ज़ा मुहम्मददीबेग की, जिसने भूतपूर्व महारावत उदयसिंह तथा उस (रघुनाथसिंह) के समय अच्छी सेवा की थी, एक हज़ार रुपये वार्षिक पेंशन नियत कर दी। गद्दीनशीनी के पूर्व महारावत की राजकुमारी वल्लभकुंवरी का जन्म हुआ था। महारावत ने उसका संबंध बीकानेर के वर्तमान महाराजा सर राजकुमारी वल्लभकुंवरी का गंगासिंहजी के साथ स्थिर किया। वि० सं० १९५४ महाराजा बीकानेर के साथ आषाढ़ सुदि ६ (ई० स० १८९७ ता० ८ जुलाई) विवाह होना को उक्त राजकुमारी का विवाह उपर्युक्त महाराजा के साथ बड़ी धूमधाम से हुआ। इस विवाह का समग्र व्यय लगभग पांच लाख रुपये के हुआ।