भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 400, कुल 534 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 400

महारावत रघुनाथसिंह ३३३

था, इसलिए मानसिंह अरणोद का महाराज माना गया, किन्तु थोड़े ही दिनों बाद प्रतापसिंह काल कवलित हो गया। अतएव मानसिंह भावी उत्तरा- धिकारी के पद पर स्थिर हुआ तथापि बहुत दिनों तक अरणोद की जागीर उसके नाम पर बनी रही। शिशुकाल समाप्त होने पर महारावत रघुनाथसिंह ने महाराजकुमार मानसिंह की शिक्षा की उचित व्यवस्था की। प्रचलित शिक्षा-प्रणाली के अनुसार उसने महाराजकुमार की शिक्षा के लिए अच्छे-अच्छे पंडित और योग्य विद्वानों को रख उसे हिंदी और संस्कृत की प्रारंभिक शिक्षा दिलवाई। फिर अंग्रेज़ी भाषा की शिक्षा देने की व्यवस्था की गई। महाराजकुमार के साथ कुछ सरदारों के लड़के भी रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे, अतएव महारावत ने उनमें विद्यानुराग उत्पन्न करने के लिए 'पिन्हे नोबल्स स्कूल' की स्थापना की। तदनन्तर वि० सं० १६५१ (ई० स० १८६४) में वहां से वह (महाराजकुमार) अजमेर भेजा गया, जहां उसने मेयो कॉलेज में विद्या- ध्ययन कर डिप्लोमा तक की अंग्रेज़ी भाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपने अध्ययनकाल में वह बड़ा होनहार विद्यार्थी माना जाता था। जैसा ऊपर लिखा गया है, वि० सं० १६५६ माघ वदि ५ (ई० स० १६०३ ता० १८ जनवरी) को उक्त महाराजकुमार का विवाह खेतड़ी के विद्याप्रेमी राजा अजीतसिंह१ की विदुषी राजकुमारी और जयसिंह की


(१) खेतड़ी का स्वर्गीय राजा अजीतसिंह राजपूताने के तत्कालीन नरेशों में बड़ा ही विद्याप्रेमी और गुणग्राहक था। हिंदू धर्म की उच्चता को ध्यान में रखते हुए वह सदा उसकी उन्नति में दत्त-चित्त रहता था। उसने प्रसिद्ध स्वामी विवेकानंद के सत्संग से लाभ उठाकर बहुत कुछ ज्ञान-वृद्धि की थी। जैसा वह विद्वान् था, वैसी ही उसकी संतति हुई और उसका पुत्र राजा जयसिंह भी बड़ा सुशील तथा होनहार था। जयसिंह ने अजमेर के मेयो कालेज में रहकर डिप्लोमा तक शिक्षा प्राप्त की थी। शिक्षण-काल में ही दुर्भाग्य से उसको राजयक्ष्मा रोग हो गया और उससे ही वि० सं० १६६६ (ई० स० १६१०) में वह उठती हुई जवानी में स्वर्गवासी हुआ। राजा अजीतसिंह की ज्येष्ठ राजकुमारी सूर्यकुंवरी शाहपुरा के स्वर्गीय राजाधिराज सर नाहरसिंह के ज्येष्ठ कुंवर उम्मेदसिंहजी (वर्तमान शाहपुराधीश) को ब्याही गई, पर