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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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३४४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत रघुनाथसिंह का ३६ वर्ष राज्य करने के पश्चात् वि० सं० १६८५ पौष सुदि ८ (ई० स० १६२६ ता० १८ जनवरी) को ७० वर्ष की आयु में निमोनिया की बीमारी से स्वर्गवास हुआ। [महारावत की बीमारी और परलोकवास] वर्तमान महारावत सर रामसिंहजी ने सर जेम्स रॉबर्ट्स (देवास सीनियर, मध्य भारत का प्रधान मन्त्री और सिविल सर्जन) जैसे प्रसिद्ध और बड़े-बड़े योग्य डाक्टर तथा वैद्यों को बुलवाकर महारावत की चिकित्सा कराई, परन्तु कुछ लाभ न हुआ और देवलिया के राज-महलों में भगवान रामचंद्र के चित्र की तरफ़ दृष्टि रखते हुए उसका जीवन-दीप बुझ गया। महारावत रघुनाथसिंह के तीन विवाह हुए थे। उनमें से दो अरणोद के महाराज की अवस्था में और एक गद्दीनशीनी के बाद वि० सं० १६४८ फाल्गुन वदि ७ (ई० स० १८९२ ता० ५० मार्च) को हुआ। [महारावत की रानियां और संतति] उसकी इन तीन रानियों में से ज्येष्ठ उगमकुंवरी खवास ठिकाने (अजमेर ज़िला) के राठोड़ ठाकुर महीपालसिंह की पुत्री और शार्दूलसिंह की पौत्री थी, जिसका वि० सं० १६४८ मार्गशीर्ष सुदि ५ (ई० स० १८६१ ता० ६ दिसंबर) को देहावसान हुआ। उक्त महाराणी के उदर से क्रमशः महाराजकुमार प्रतापसिंह, राजकुमारी वल्लभकुंवरी और महाराजकुमार मानसिंह अरणोद में ही उत्पन्न हुए। राज- कुमारी वल्लभकुंवरी का विवाह वर्तमान महाराजा साहब बीकानेर से हुआ, जिसका उल्लेख ऊपर किया गया है। उक्त राजकुमारी के उदर से महाराजकुमार शार्दूलसिंह का जन्म हुआ, जो बीकानेर का युवराज है और बहुत शांत- चित्त, गंभीर और होनहार पुरुष है। उक्त राजकुमारी का वि० सं० १६६३ भाद्रपद वदि ३० (ई० स० १६०६ ता० १६ अगस्त) को परलोकवास हो गया। दूसरी महाराणी केसरकुंवरी सेमलिया (मध्य भारत का सैलाना राज्य) के महाराज भवानीसिंह की पुत्री और नाहरसिंह की पौत्री थी। इस राणी का देहांत भी महारावत की विद्यमानता में वि० सं० १६६५ वैशाख वदि १३ (ई० स० १६०८ ता० २८ अप्रेल) मंगलवार को हो गया। उक्त राणी ने