राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास
क्षत्रिय जाति का हित होकर विवाह तथा गमी के अवसर पर होनेवाला अपव्यय रुक गया। फिर भी अभी इस विषय में बहुत कुछ सुधार 'की गुंजाइश है। प्रतापगढ़ राज्य में चिकित्सालयों का भी उसके समय में ही विस्तार हुआ और प्रतापगढ़ तथा देवलिया में अंग्रेज़ी पद्धति पर चिकित्सा करने के लिए वहां चिकित्सालय के भवन निर्माण किये गये। अंग्रेज़ी औषध ग्रहण न करनेवाले व्यक्तियों की आयुर्वेदोक्त रीति से चिकित्सा कराने के लिए महारावत के नाम पर महाराजकुमार मानसिंह ने "रघुनाथ औषधालय" स्थापित किया। उक्त महाराजकुमार के परलोकवास के पीछे वहां अव्यवस्था होने लगी, इसपर महारावत ने उधर ध्यान देकर उसको सुव्यवस्थित बनाया। उसके समय में रजिस्ट्री, स्टाम्प आदि के क़ानून जारी हुए। गांवों में डाक पहुंचाने की भी उसके समय में सुव्यवस्था हुई। प्रतापगढ़ से मंद- सोर तक सड़क बनवाने के अतिरिक्त गांवों में भी कई जगह के मार्ग ठीक बनवाये गये। पुलिस का भी उसके समय में अच्छा प्रबंध रहा और कई बड़े-बड़े उपद्रवी भील पकड़े गये, जिससे अंग्रेज़-सरकार की उसपर प्रसन्नता रही। महारावत ने देवलिया के पुराने महलों का, जीर्णोद्धार करवाकर वहां कुछ नये महल बनवाये। कई स्थानों पर तालाब, कुएं आदि बनवाने के अतिरिक्त कितने ही नये भवन भी बनवाये गये। भिक्षुकों के लिए महारावत ने अपने यहां सदाव्रत भी जारी किया। उसके समय में प्रतापगढ़ में एक छापाखाना भी खोला गया, जो "रघुनाथ यंत्रालय" के नाम से प्रसिद्ध है। महारावत रघुनाथसिंह शांत, सदाचारी और उदार शासक था। वह अपनी प्रजा से प्रेम करता और प्रजा भी उसको पितृ-तुल्य मानती थी। महारावत का व्यक्तित्व उसकी शासन-शैली प्राचीन होने पर भी उसके विचार उदार थे। वह प्रजा की प्रार्थनाओं को सुनकर उनको सन्तुष्ट करने का सदा प्रयत्न करता था। वह मृदुभाषी, पूर्ण ईश्वर-भक्त, धैर्यवान और कष्ट-सहिष्णु था। सब धर्मों के प्रति