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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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भूगोल सम्बन्धी वर्णन ६ हिंदुओं के त्योहारों में होली, गनगौर, रक्षाबंधन, तीज, दशहरा और दीवाली मुख्य हैं। रक्षाबन्धन विशेषतः ब्राह्मणों और दशहरा राजपूतों का त्योहार है। दशहरे के अवसर पर महारावतजी की त्योहार सवारी धूमधाम से निकलती है। दीवाली व्यवसायी- वर्ग का त्योहार है, परंतु उसे सब हिंदू समानता से मनाते हैं। होली भी सब वर्गों का त्योहार है और सब जातियों के लोग फाग खेलते हैं। भीलों के त्योहारों में होली, दशहरा और दीवाली मुख्य हैं। गनगौर और तीज स्त्रियों के त्योहार हैं। मुसलमानों के त्योहार दोनों ईदें—‘इदउलफ़ितुर’ और ‘इदुलजुहा’—तथा मोहर्रम (ताज़िये) हैं। अरणोद के पास गौतमनाथ महादेव का मेला वैशाख सुदि १५ से दो दिन तक प्रति वर्ष होता है। अंबा माता (प्रतापगढ़ से ४ मील उत्तर) का मेला प्रति वर्ष कार्तिक सुदि २ को होता है, जहां मेले बहुत से यात्री जाते हैं। सीतामाता का मेला प्रत्येक तीसरे वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में होता है। इस राज्य में अंग्रेज़ी डाकखाने प्रतापगढ़, देवलिया, अरणोद, नीनोर और जाजली में हैं। तारघर केवल प्रताप- डाकखाने और तारघर गढ़ में ही है। पहले राज्य की ओर से शिक्षा का कोई प्रबंध न था, जिससे लोग पंडितों, जैन यतियों तथा अन्य घरू पाठशालाओं में अपने बालकों को शिक्षा दिलाते थे। अब राज्य की तरफ़ से प्रतापगढ़ शिक्षा और देवलिया के अतिरिक्त वसाड़, केरोट (खेरोट), धामल्या, गंधेर, पानमोड़ी, दलोठ, कोटड़ी, नीनोर, वरमंडल, पीलू, कुणी, अवलेसर, नौगामा, कुलथाना, चूंLoopना, अमलावद, सरीपीपली तथा पारल्या में राज्य की तरफ़ से प्रारम्भिक पाठशालाएं खोल दी गई हैं। धमोतर, बारेवरदा, अरणोद, सालिमगढ़ और डोराना में सरदारों की तरफ़ से पाठशालाएं हैं, जहां प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है। राजधानी प्रतापगढ़ में एक हाईस्कूल है और संस्कृत की ज्ञानवृद्धि के लिए पृथक् पाठशाला २