राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत रामसिंहजी - ३५५
उसकी कार्यशैली और सरलता से वहां के निवासी संतुष्ट रहे । वि० सं० १६६६ ( ई० स० १६४० ) से इस पद पर राजा त्रिभुवनदास, एम० ए० नियत किया गया है, जो अनुभवी, कार्यकुशल तथा कर्तव्यपरायण व्यक्ति है और गुजरात की तरफ़ की देशी रियासतों में ऐसे दायित्वपूर्ण पदों पर काम कर चुका है । महारावत सर रामसिंहजी के तीन विवाह हुए हैं। उनमें से ज्येष्ठ शेखावत महाराणी सीकर के रावराजा माधवसिंह की पुत्री थी । उक्त विवाह और संतति महाराणी के उदर से महाराजकुमारी देवेन्द्रकुंवरी का वि० सं० १६८१ फाल्गुन वदि ८ ( ई० स० १६२५ ता० १६ फ़रवरी ) को जन्म हुआ और उसके पश्चात् क्रमशः उसके तीन कुंवरियां और उत्पन्न हुईं; किन्तु वे तीनों ही कालकवलित हो गईं तथा उक्त महाराणी का भी वि० सं० १६८७ पौष सुदि १४ ( ई० स० १६३० ता० १६ दिसम्बर) को देहांत हो गया । इसपर महारावतजी का द्वितीय विवाह डुमरांव ( बिहार ) के महाराजा सर केशवप्रसादसिंह, सी० वी० ई० की राजकुमारी मेघराजकुंवरी से वि० सं० १६८६ चैत्र सुदि १५ ( ई० स० १६३२ ता० २० अप्रेल ) को हुआ, जिसके उदर से महाराजकुमारी इंद्र- कुंवरी का वि० सं० १६६० वैशाख वदि ७ (ई० स० १६३३ ता० १६ अप्रेल), उर्मिलाकुंवरी का वि० सं० १६६४ श्रावण वदि १३ ( ई० स० १६३७ ता० ४ अगस्त ) और कुसुमकुंवरी एवं कुमुदकुंवरी दोनों का वि० सं० १६६६ प्रथम श्रावण सुदि १ ( ई० स० १६३६ ता० १७ जुलाई ) सोमवार को जन्म हुआ है । उपर्युक्त दोनों विवाहों से एक भी राजकुमार का जन्म न होने के कारण महारावतजी ने अपना तीसरा विवाह काठियावाड़ के अन्तर्गत ध्रांगधरा के मेजर महाराजा सर घनश्यामसिंहजी, जी० सी० आई० ई०, के० सी० एस० आई० की पुत्री महेंद्रकुंवरी से वि० सं० १६६१ द्वितीय वैशाख सुदि ३ (ई० स० १६३४ ता० १६ मई) को किया, जिससे भी प्रथम एक राजकुमारी यशवंतकुंवरी का वि० सं० १६६४ फाल्गुन वदि १० (ई० स० १६३८ ता० २४ फ़रवरी ) को जन्म हुआ ।