भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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धमोतर ३६१ प्रथम वर्ग के सरदार धमोतर धमोतर के सरदार महारावत सूरजमल के छोटे पुत्र सैंसमल- (सहसमल) के वंशधर हैं१ और वे सिंहावत (सहसावत) कहलाते हैं। उनकी उपाधि "ठाकुर" है। इस राज्य में इस ठिकाने की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है और आय में भी इस ठिकाने के बराबर दूसरा कोई ठिकाना नहीं है। ख्यातों में लिखा है कि सैंसमल उदयपुर के महाराणाओं की सेवा में रहता था, इसलिए वहां से उसको नींबाहेड़ा और खोडीप की जागीर मिली और वह महाराणा की तरफ़ से युद्ध करता हुआ काम आया। तदनंतर उसका पुत्र कांधल वहां का स्वामी हुआ, जो मेवाड़ छोड़- कर महारावत विक्रमसिंह (बीका) के साथ कांठल में गया और वहां उसका प्रभुत्व स्थिर करने में सदा उस (विक्रमसिंह) का साथी रहा। इसपर उसको वहां से धमोतर का पट्टा जागीर में मिला। बादशाह अकबर के समय आंबेर (जयपुर राज्य) के कछुवाहा कुंवर मानसिंह ने उदयपुर के महाराणा प्रतापसिंह (प्रथम) पर चढ़ाई की, उस समय देव- लिया से महाराणा की सहायतार्थ जो सेना गई, उसमें ठाकुर कांधल भी था और वह हल्दीघाटी के युद्ध-क्षेत्र में शाही सेना से वीरतापूर्वक लड़कर काम आया। कांधल का पुत्र गोपालदास था, जो बांसवाड़ा के महारावल की सहायतार्थ किसी युद्ध में लड़कर मृत्यु को प्राप्त हुआ। गोपालदास के ( १ ) वंशक्रम—[ १ ] सैंसमल. [ २ ] कांधल [ ३ ] गोपालदास [ ४ ] जोधसिंह [ ५ ] जोगीदास [ ६ ] जसकरण [ ७ ] पृथ्वीराज (पृथ्वीसिंह) [ ८ ] फ़तहसिंह [ ६ ] कुबेरसिंह [ १० ] कल्याणसिंह [ ११ ] नाथूराम (नाथूसिंह) [ १२ ] हरीसिंह [ १३ ] मोहकमसिंह [ १४ ] रोड़सिंह [ १५ ] हमीरसिंह [ १६ ] केसरीसिंह [ १७ ] हिंदू सिंह और [ १८ ] दयालसिंह। ४६