राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished534 पृष्ठ
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३७० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास
भाई सरदारसिंह ( बगड़ावद के ठाकुर वैरीशाल के पुत्र ) को अपना
उत्तराधिकारी बनाया । सरदारसिंह का पुत्र शिवसिंह और, उसका
खुशहालसिंह हुआ । खुशहालसिंह भी निःसंतान था, इसलिए अमरसिंह
के चतुर्थ वंशधर दुलहसिंह के प्रपौत्र कीर्तिसिंह का पुत्र। हिन्दू सिंह गोद
जाकर सालिमगढ़ का अधिकारी हुआ, जो वहां का वर्तमान सरदार है।
अचलावदा
महारावत हरिसिंह के छोटे पुत्र माधवसिंह को प्रतापगढ़ राज्य
की तरफ़ से अचलावदा की जागीर मिली । उस ( माधवसिंह ) के वंशज१
अचलावदा के स्वामी हैं और उनकी उपाधि "ठाकुर" है।
माधवसिंह के बेटे जगतसिंह के तीन पुत्र जोधसिंह, ज़ालिमसिंह
और दौलतसिंह हुए । जोधसिंह और ज़ालिमसिंह का वंश न चला और
वे पिता की जीवितावस्था में मर गये, इसलिए उनका छोटा भाई दौलत-
'सिंह अपने पिता का क्रमानुयायी हुआ । तदनंतर चिमनसिंह, लक्ष्मणसिंह,
भीमसिंह, रत्नसिंह और माधवसिंह (दूसरा) क्रमशः वहां के स्वामी
हुए। माधवसिंह के दो पुत्र - भवानीसिंह और गोपालसिंह हुए- जिनमें
से भवानीसिंह अपने पिता का अधिकारी हुआ और वहां का वर्तमान
सरदार है।
वरडिया
वरडिया के सरदार मेवाड़ के सुप्रसिद्ध रावत चूंडा के वंशधर हैं²।
उनकी उपाधि "ठाकुर" है।
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( १ ) वंशक्रम - [ १ ] माधवसिंह [ २ ] जगतसिंह [ ३ ] दौलतसिंह [ ४ ]
चिमनसिंह [ ५ ] लक्ष्मणसिंह [ ६ ] भीमसिंह [ ७ ] रत्नसिंह [ ८ ] माधवसिंह
(दूसरा) और [ ६ ] भवानीसिंह ।
( २ ) वंशक्रम - [ १ ] मनोहरदास [ २ ] लालसिंह [ ३ ] अजबसिंह [ ४ ]
कुशालसिंह [ ५ ] सामंतसिंह [ ६ ] जगतसिंह [ ७ ] मोहकमसिंह [ ८ ] चिमनसिंह