राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७२ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास फ़ौजसिंह का पुत्र था, गोद लिया । वि० सं० १६७० ( ई० स० १६१३) में सामंतसिंह का देहांत होने पर दौलतसिंह घरडिया का सरदार बना, जो वहां का वर्तमान ठाकुर है। उसके दो पुत्र भगवतसिंह और प्रह्लादसिंह हैं। बोड़ी-साखथली बोड़ी-साखथली के सरदार महारावत बाघसिंह के पुत्र खान के वंशधर हैं¹ और उनकी उपाधि "ठाकुर" है । खान का पुत्र दुर्गादास अपने बेटों सहित महारावत भानुसिंह के साथ जीरण में मारा गया । फिर महारावत सिंहा ने दुर्गादास के पौत्र रणछोड़दास को बोड़ी-साखथली की जागीर प्रदान की । रणछोड़दास के पीछे अजबसिंह, गोपालसिंह, किशनसिंह और हरिसिंह क्रमशः वहां के ठाकुर हुए। हरिसिंह का पुत्र रतनसिंह तथा पौत्र छत्रसाल (शत्रुसाल) था। छत्रसाल के निःसंतान होने से ठिकाना राज्याधिकार में चला गया, परन्तु महारावत रघुनाथसिंह ने वि० सं० १६४८( ई० स० १८६१) में उस- (छत्रसाल) के चाचा सूरजमल के पुत्र बलवंतसिंह (जो वहां का वर्तमान सरदार है) को प्रदानकर उसको वहां का सरदार बनाया । फिर उसने उसको प्रथम वर्ग के सरदारों में दाख़िल किया एवं वि० सं० १६७७ वैशाख वदि १४ ( ई० स० १६२० ता० १७ अप्रेल) को उसे दीवानी तथा फ़ौजदारी के मुक़दमे करने के अधिकार भी दे दिये। उसके पांच पुत्र—भैरवसिंह, बहादुरसिंह, नाहरसिंह, शेरसिंह और पर्वतसिंह—हैं। जाजली इस ठिकाने के स्वामी महारावत सूरजमल के छोटे पुत्र सहसमल के पौत्र गोपालदास (धमोतर का स्वामी) के छोटे पुत्र पूरा के वंशधर (१) वंशक्रम - [ १ ] खान [ २ ] दुर्गादास [ ३ ] ईश्वरदास [ ४ ] रणछोड़दास [ ५ ] अजबसिंह [ ६ ] गोपालसिंह [ ७ ] किशनसिंह [ ८ ] हरिसिंह [ ६ ] रतनसिंह [ १० ] छत्रसाल और [ ११ ] बलवंतसिंह ।