भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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प्रसिद्ध और प्राचीन घराने ३८१ महारावत उदयसिंह का प्रथम विवाह वि० सं० १६१७ ( ई० स० १८६०) में नामली (रतलाम राज्य) के सोनगरा चौहान ठाकुर तख्तसिंह की पुत्री स्वरूपकुंवरी के साथ हुआ था। इस प्रसङ्ग से तख्तसिंह का छोटा पुत्र बखतावरसिंह उक्त महारावत के पास चला गया, जिसपर उसने वि० सं० १६४० (ई० स० १८८३) में डोराणा और जसवन्तपुरा नामक दो गांव उसे जागीर में दिये। बखतावरसिंह भाषा का अच्छा कवि था। वहां का वर्तमान सरदार दलपतसिंह है। प्रसिद्ध और प्राचीन घराने ++++卐++++ देश-रक्षा में राजपूत सरदारों की जैसी सेवाएं हैं, वैसी ही राजनैतिक क्षेत्र में मन्त्री-वर्ग और कर्मचारियों की सेवाएं भी खास महत्त्व रखती हैं। जिस राज्य में मन्त्री-वर्ग तथा कर्मचारी योग्य, ईमानदार तथा अनुभवी होते हैं उस राज्य में आंतरिक विप्लव कम होते हैं और सुख-समृद्धि का विकास होता है। इतिहास के अभाव में विभिन्न राज्यों के कर्मचारियों की सेवाओं का पता पूरा-पूरा नहीं चलता। यदि शोध किया जाय तो बहुत कुछ ऐसे साधन भी मिलेंगे, जिनसे उनके द्वारा होनेवाली सेवाओं पर अच्छा प्रकाश पड़ सके। प्रतापगढ़ राज्य के मन्त्रीवर्ग में भी समय-समय पर उल्लेखनीय व्यक्ति हो गये हैं, जिन्होंने इस राज्य की रक्षा और उन्नति के लिए अच्छी सेवाएं की हैं; परंतु भारतीयों में इतिहास-संरक्षण की भावना कम होने से उनकी सेवाएं भी बहुधा अज्ञात ही हैं। इस राज्य के मंत्रियों में अधिकतर वैश्य समुदाय की ही प्रधानता रही है और अन्य की कम। वैश्यों में भी दिगंबर सम्प्रदाय की बहुलता होने से वे ही समय-समय पर मंत्री-पद पर नियत किये जाते थे, जिनका चुनाव किसी खास परिपाटी अथवा गुणों के आधार पर नहीं, अपितु बहुधा वंशपरंपरा अथवा राजा की कृपा