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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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: प्रसिद्ध और प्राचीन घराने ३६३ के समय वह “अकाल सहायक समिति” का सेक्रेटरी बनाया गया। महाराजकुमार मानसिंह के अजमेर में विद्याध्ययन करते समय वह उसका शिक्षक और गार्जियन नियत हुआ। फिर वह मैजिस्ट्रेट और दीवानी अदालत का हाकिम बनाया गया और उसके साथ ही राज्य की तरफ़ से पोलि- टिकल एजेंसी के संबंध का महक्माख़ास का अंग्रेज़ी कार्य भी वह करता रहा। वि० सं० १६६१ वैशाख वदि ५ ( ई० स० १६०४ ता० ५ अप्रेल ) को २७ वर्ष की आयु में उसकी प्लेग की बीमारी से मृत्यु हुई। जोधकरण का छोटा भाई मुंशी फ़तहलाल है, जिसने अंग्रेज़ी भाषा में बी० ए० तक की शिक्षा प्राप्त की है। वह प्रारंभ में प्रतापगढ़ के स्कूल का हेड मास्टर बनाया गया। उसके उत्तम प्रबंध से उक्त स्कूल की अच्छी उन्नति हुई और उसके कार्यकाल में ही वहां मैट्रिक तक की शिक्षा दी जाने की व्यवस्था हो गई। वह महाराजकुमार मानसिंह का बाल्यावस्था का साथी और कृपापात्र एवं वर्तमान महारावत सर रामसिंहजी का शिक्षक भी रहा है। राज्य के भिन्न-भिन्न ऊंचे पदों पर समय-समय पर उसकी नियुक्ति होने से उसका अनुभव अधिकाधिक बढ़ता रहा, जिससे वह कई सीमा संबंधी मुकदमों और कान्फ़्रेंसों में प्रतिनिधि बनाकर भेजा गया, जहां उसने योग्यतापूर्वक कार्य किया। प्रतापगढ़ राज्य में अफ़ीम की खेती बंद करने से जो हानि होती है, उसने उसका स्पष्ट और सप्रमाण विवरण पेश किया, जो राज्य के लिए हितकर सिद्ध हुआ। वह इस समय सुपरिन्टेन्डेन्ट एग्रीकल्चर और बाग़ तथा ख़ज़ाने का अफ़सर है। भांचावत भांचावत भी हुंबड़ जाति के वैश्य हैं। इस वंश के शाह भूरा ने बोरी-रीछड़ी के सीमा संबंधी मुक़दमे में प्रतापगढ़ राज्य की पूरी सेवा की थी। फिर मन्नालाल भांचावत महारावत रघुनाथसिंह के समय वि० सं० १६५६ ( ई० स० १६०२ ) में प्रतापगढ़ राज्य का मंत्री बनाया गया। उसके मंत्रित्वकाल में कैप्टेन ए० टी० होम ने प्रतापगढ़ राज्य में पैमाइश का कार्य कराया, जिसमें उसकी सेवा अच्छी रही। बांसवाड़ा राज्य के ५०