राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत क्षेमकर्ण ४६
क्षेमकर्ण का मालवे के सुलतान के पास जाना गयो, जहां पहले महाराणा मोकल के समय अप्रसन्न होकर महाराणा लक्षसिंह (लाखा) के ज्येष्ठ पुत्र चूंडा और अज्जा सुलतान होशंग के पास जाकर रहे थे। महमूद खिलजी और महाराणा कुंभकर्ण के बीच वैमनस्य था, क्योंकि उस (महमूद) को महाराणा ने चढ़ाई कर क़ैद कर लिया था। अतएव क्षेमकर्ण के रुष्ट होकर जाने पर सुलतान ने महाराणा को चिढ़ाने एवं उस (महाराणा) की कमज़ोरियों का भेद पाने की दृष्टि से उसको अपने यहां रख लिया। महमूद, महाराणा से अपनी पूर्व पराजय का बदला लेना चाहता था। इसलिए उसने वि० सं० १५००, १५०३, १५११ और १५१३ (ई० स० क्षेमकर्ण का मेवाड़ पर मालवे के सुलतान को चढ़ा लाना १४४३, १४४६, १४५४ और १४५६) में मेवाड़ पर आक्रमण किये। उसने गुजरात के सुलतान क़ुतबुद्दीन को भी अपनी तरफ़ मिलाकर संयुक्त सेना के साथ पृथक्-पृथक् मार्ग से मेवाड़ पर चढ़ाइयां कीं, परन्तु इससे महाराणा की शक्ति न घटी और उन्हें हानि उठाकर लौटना पड़ा। महमूद के मेवाड़ के
शज़नीख़ां (मुहम्मदशाह) के पुत्र मसऊद को, जिसको दूसरे सरदार मुहम्मदशाह की मृत्यु पर गद्दी देना चाहते थे, हटाकर यह मालवे का सुलतान बन गया। वि० सं० १५३२ (ई० स० १४७५) में इसकी मृत्यु हुई (डफ़; दि क्रोनोलोजी ऑफ़् इंडिया; पृ० २६२)। (१) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० १०५४। मुंहणोत नैणसी ने अपनी ख्यात में लिखा है कि जब राणा कुंभा गद्दी पर बैठा, तो दोनों भाइयों में परस्पर भूमि के लिए विरोध उत्पन्न हो गया। खेमा मांडू के सुलतान के पास पहुंचा और वहां से सैनिक सहायता प्राप्त कर उसने मेवाड़ को बड़ा धक्का पहुंचाया। राणा कुम्भा और खेमा में विरोध बना रहा, परंतु राणा उसको मेवाड़ से बाहर न निकाल सका। अंत में दोनों का इसी स्थिति में देहांत हो गया (प्रथम भाग, पृ० ६३-४)। नैणसी का उपर्युक्त कथन कि 'राणा उसको मेवाड़ से बाहर न निकाल सका', ठीक नहीं जान पड़ता। जैसा कि आगे बतलाया गया है, क्षेमकर्ण मेवाड़ से चले जाने के बाद ही बहरी से लड़ा था। वह महाराणा-द्वारा सादड़ी छीने जाने पर मालवे के सुलतान महमूद के पास चला गया था और वहां उसने जागीर प्राप्त की थी, जो संभवतः मालवे में रामपुरा-भाणपुरा (इंदौर राज्य) एवं वर्त्तमान प्रतापगढ़ राज्य के निकट ही हो। ७