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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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५० 'प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास आक्रमण में क्षेमकर्ण का पूरा हाथ था१, पर परिणाम क्षेमकर्ण के लिए लाभदायक न हुआ और आजीवन उन दोनों भाइयों के बीच द्वेष बना रहा। क्षेमकर्ण का मालवे के सुलतान के पास रहना वहां के दूसरे सरदारों को अखरता था, क्योंकि उच्चाभिलाषी होने से वह वहां के सरदारों से मेल खानसलह के अनुचर वहरी न रखता था। इंदौर राज्य के खड़ावदा गांव की से क्षेमकर्ण का युद्ध बावड़ी के वि० सं० १५४१ कार्तिक सुदि २ (ई० स० १४८४ ता० २१ अक्टूबर) गुरुवार के शिलालेख से पाया जाता है कि मालवे के सुलतान महमूद के एक सरदार खानसलह२ के अनुचर मलिक वहरी३ और क्षेमकर्ण के बीच शंखोद्धार४ में युद्ध हुआ, (१) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० १०५४। नैणसी की ख्यात; प्रथम भाग, पृ० ६३-४। (२) खानसलह, हमीरपुर के कलचुरीवंशी राजा भैरव के पुरोहित के वंशधर पुरुषोत्तम का पुत्र था। उसका वास्तविक नाम घुघऊ था। कालपी (जौनपुर) के शासक अब्दुलक़ादिर ने, जो दिल्ली की सल्तनत के अधीन था, उसको मुसलमान बना- कर उसका नाम 'सलह' रक्खा। फिर उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाकर उसने उसको अपना विश्वासपात्र सेवक बनाया। कालपी पर मांडू के सुलतान होशंग की चढ़ाई होने पर अब्दुलक़ादिर ने पुत्र-पुत्री तथा धन-सहित खानसलह को होशंग को सौंप दिया। होशंग ने उसकी पूर्व-प्रतिष्ठा क़ायम रक्खी। वह (सलह) होशंग के पीछे मालवे पर अधिकार करनेवाले सुलतान महमूद ख़िलजी का भी कृपापात्र रहा, जिसने उसको ख़ान की उपाधि दी थी। ख़ानसलह ने सुलतान होशंग, महमूद ख़िलजी एवं ग़यासु- द्दीन के समय कई युद्धों में वीरता दिखलाई थी। (३) मलिक वहरी को खड़ावदे के शिलालेख में क्षत्रिय लिखा है। ख़ान- सलह ने उसको मुसलमान बना लिया था। खड़ावदे के उपर्युक्त शिलालेख से ज्ञात होता है कि वहरी वीर होने के साथ ही पूर्ण स्वामिभक्त था एवं उसको संस्कृत से भी अनुराग था। उसने खड़ावदे के भीलों को विजय करने के पीछे वहां क़िला, बावड़ी और बगीची बनवाकर महेश भट्ट से (जिसका मेवाड़ राज्य में बड़ा सम्मान था और वहां उसने कई प्रशस्तियों की रचना की थी) इस शिलालेख की रचना करवाई, जो तत्कालीन मालवे के इतिहास के लिए बहुत ही उपयोगी है। (४) खड़ावदा गांव से दूर चंबल नदी के तट पर (इंदौर राज्य के रामपुरा- भानपुरा नामक ज़िले में) शंखोद्धार एक प्राचीन तीर्थ है। महाभारत (द्रोणपर्व, अ० ६७ वां)