भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( ९ ) उपस्थित ये सब देववृन्द अनुपम कर्मवाले रणाङ्गण में अप्रतिभट (प्रतिभटरहित) आपको देखते हैं। आपके विषय में मेरी यह अशक्ति मेरे लिए लज्जाकर नहीं है, क्योंकि लोकनाथ आपके द्वारा मुझसे विमुख की हुई स्वशक्ति का अपने में नियोजन करने से मैं असमर्थ हो गया हूँ— अक्षयं मधुहन्तारं जानामि त्वां सुरेश्वरम् । धनुषोऽस्य परामर्शात् स्वस्ति तेऽस्तु परन्तप ॥१७॥ एते सुरगणाः सर्वे निरीक्षन्ते समागताः । त्वामप्रतिमकर्माणमप्रतिद्वन्द्वमाहवे ॥१८॥ न चेयं तव काकुत्स्थ व्रीडा भवितुमर्हति । त्वया त्रैलोक्यनाथेन यदहं विमुखीकृतः ॥१९॥ पद्मपुराण में परशुरामजी कहते हैं— राम राम महाबाहो न वेद्मि त्वां सनातनम् । जानाम्यद्यैव काकुत्स्थ तव वीर्यगुणादिभिः ॥ त्वमादिपुरुषः साक्षात् परब्रह्म परोऽव्ययः । त्वमनन्तो महाविष्णुर्वासुदेवः परात्परः ॥ नारायणस्त्वं श्रीशस्त्वमीश्वरस्त्वं त्रयीमयः । त्वं कालस्त्वं जगत्सर्वमकाराख्यस्त्वमेव च ॥ स्रष्टा धाता च संहर्ता त्वमेव परमेश्वरः । त्वमचिन्त्यो महद्भूतं विश्वरूपस्त्वणुर्महान् ॥ चतुःषट्पञ्चगुणवांस्त्वमेव परमेश्वरः । त्वं यज्ञस्त्वं वषट्कारस्त्वमोङ्कारस्त्रयीमयः ॥ व्यक्ताव्यक्तस्वरूपस्त्वं गुणभृन्निर्गुणः परः । स्तोतुं त्वामहमशक्तश्च वेदानाम्प्यगोचरम् ॥ यच्चापमानं कृतवांस्त्वां युयुत्सुतया प्रभो । तत्क्षन्तव्यं त्वया नाथ इत्यादि ॥ अहं वेद्मि महात्मानं रामं सत्यपराक्रमम् । वसिष्ठोऽपि महातेजा ये चेमे तपसि स्थिताः ॥ महर्षि विश्वामित्र कहते हैं— सत्यपराक्रम राम को मैं जानता हूँ, महातेजा महर्षि वसिष्ठ जानते हैं, ये अन्य भी तपोनिष्ठ महात्मा राम को जानते हैं। उन्हें सर्वसाधारण लोग नहीं जानते हैं। भाव यह कि वे साक्षात् परब्रह्म हैं। आगे वे महर्षि कहते हैं— अद्य गच्छामहे राम सिद्धाश्रममनुत्तमम् । तदाश्रमपदं तात तवाप्येतद् यथा मम ॥ हे राम, आज हम सिद्धाश्रम में जा रहे हैं वह आश्रम जैसा मेरा है वैसा ही आप का भी है, क्योंकि आप विष्णुरूप हैं ।