रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबुद्धदेव ने कहा कि पूर्वकाल में 'शुद्धोदन ही दशरथ थे, महामाया (बुद्धमाता) राम की माता थी, यशोधरा (राहुल की माता) सीता थी, आनन्द भरत थे और मैं राम था। अनामक जातक ऐसा ही एक अनामक जातक है। तीसरी शती ई० में अनामक जातक का चीनी अनुवाद हुआ है। इस जातक में किसी भी पात्र के नाम का उल्लेख नहीं है, लेकिन राम और सीता का वनवास, सीताहरण, जटायु का वृत्तान्त, वाली और सुग्रीव का युद्ध, सेतुबन्ध, सीता की अग्निपरीक्षा आदि के संकेत मिलने हैं। इसके अनुसार राम की विमाता कैकेयी के कारण पिता द्वारा वनवास नहीं दिया जाता, किन्तु वे अपने मामा के आक्रमण की तैयारियां सुनकर स्वेच्छा से राज्य छोड़ देते हैं। वाली के वध का वृत्तान्त भी इसमें बदल गया है। राम के धनुषबाण को देखते ही वाली भयभीत होकर भाग जाता है। शायद बोधिसत्त्व राम के द्वारा वाली का वध उचित नहीं समझा गया हो। उसका सारांश निम्नरोक्त है-- एक समय बोधिसत्त्व एक महान् राजा हुआ। वह सदा ही दान, प्रियवचन, न्याय तथा समदर्शिता से सभी जीवों की रक्षा करता था। उसका मामा भी राजा था। वह लोभी, निर्लज्ज, निर्दय तथा दुष्ट था। उसने बोधिसत्त्व का राज्य छीन लेने के लिए सेना तैयार की। बोधिसत्त्व के अमात्यों ने भी सेना तैयार की। सेना का निरीक्षण करके बोधिसत्त्व अपने स्वार्थ के लिए असङ्ख्य मनुष्यों का जीवन नष्ट करना ठीक नहीं यह सोचकर, राज्य छोड़कर वन चला गया। मामा ने राज्य पर अधिकार कर लिया। बोधिसत्त्व ने वही वन में अपनी रानी के साथ निवास किया। एक दुष्ट नाग ने छद्म से उस समय रानी का हरण कर लिया जिस समय बोधिसत्त्व जङ्गल में फल लेने के लिए गया था। एक पक्षी ने उस दुष्ट नाग का मुकाबला किया। नाग ने पक्षी को मारा और उसका दाहिना पङ्ख तोड़ डाला और स्वयं समुद्र में स्थित अपने द्वीप में चला गया। राजा फल लेकर लौटा, रानी को न पाकर वाण लेकर रानी की खोज में इधर उधर घूमने लगा। एक नदी के स्रोत पर पहुँच कर राजा ने एक बन्दर को देखा, जो बड़ा उदास था। पूछने पर उस बन्दर ने कहा—मैं एक राजा था, मेरे चाचा ने मेरा राज्य छीन लिया है। अब मेरा कोई साथी नहीं रहा। राजा ने भी अपना वृत्तान्त सुनाया। दोनों ने परस्पर सहायता के लिए वचनबद्ध होकर मैत्री कर ली। दूसरे दिन बन्दर ने अपने चाचा से युद्ध किया। राजा ने धनुष में बाण का सन्धान किया। जिसे देखते ही बन्दर का चाचा डरकर भाग निकला। बन्दर ने अपने साथियों को रानी खोजने के लिए भेजा। बन्दरों ने एक पक्षी देखा। उसने बताया कि नाग ने रानी को चुराया है। कपिराज ने अपनी सेना को समुद्रपार जाने में असमर्थ पाया। इन्द्र ने छोटे बन्दर का रूप धारण कर कहा—"प्रत्येक बन्दर को पर्वत का एक टुकड़ा लाने की आज्ञा दो। इस प्रकार समुद्र एक मार्ग बन जायेगा और आप द्वीप में पहुँच जायेंगे।" बन्दरों ने ऐसा ही करके समुद्र पार किया और नागद्वीप को घेर लिया। नाग ने एक विषैला घना कुहरा उत्पन्न किया जिससे सभी पृथ्वी पर गिर पड़े। छोटे बन्दर ने एक दैव ओषधि सबकी नाकों में लगायी जिससे सब स्वस्थ हो गये। नाग ने आँधी और बादलों से सूर्य को छिपा लिया। बिजली चमकने लगी। छोटे बन्दर ने बताया कि बिजली ही नाग है। राजा ने एक बाण से नाग को मार डाला। छोटे बन्दर ने रानी को मुक्त किया एवं राजा अपने मामा का देहान्त सुनकर अपने देश चला गया। राजा ने रानी से कहा—"पति से अलग दूसरे के घर में निवास करने पर लोग स्त्री के आचरण पर सन्देह करते हैं। तुम्हें स्वीकार करने में परम्परा के अनुसार कहाँ तक औचित्य है?"