भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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अध्याय अवतार-सामग्री २८७ राम की दिनचर्या (सर्ग २-६)। एकपत्नीव्रत के कारण कृष्णावतार में बहुत पत्नियों की प्राप्ति का राम को वरदान (सर्ग ७।१-२८)। कामपीड़ित देवपत्नियों को राम द्वारा गोपिकाएँ बनने का आश्वासन (सर्ग ७।२९ आदि), कृष्णावतार में गुणवती तथा पिंगला को सत्यभामा तथा कुब्जा बनने का आश्वासन देना वर्णित है (सर्ग ८)। इसी में सीता-सहित राम की कुरुक्षेत्र यात्रा का वर्णन है (सर्ग ९)। जन्मकाण्ड में राम द्वारा सीता-त्याग (सर्ग १-३), कुशजन्म तथा वाल्मीकि द्वारा लव की सृष्टि (सर्ग ४)। कुश और लव का राम की सेना से युद्ध करना, सीता की शपथ से पृथ्वी का प्रकट होना तथा राम से भयभीत होकर सीता को लौटा देना। उर्मिला, माण्डवी और श्रुतकीर्ति के दो दो पुत्रों का होना वर्णित है (सर्ग ६-९)। विवाहकाण्ड में राम आदि के आठों पुत्रों के विवाह वर्णित हैं। राज्यकाण्ड में राम के राज्य-शासन का विस्तृत वर्णन है। इसमें रामका स्वरूप-सौन्दर्य देखकर बहुत सी नारियाँ मोहित हुई हैं। कृष्णावतार में उनकी लालसा-पूर्ति का आश्वासन दिया गया है। इसे कृष्णावतार का प्रभाव कहना निष्प्रमाण कल्पनामात्र है। कृष्णोपनिषत् से ही राम का लोकोत्तर सौन्दर्य प्रसिद्ध है। उसके अनुसार स्त्रियों की कौन कहे ऋषि-महर्षि लोग भी उनके सौन्दर्य से मोहित हुए हैं और उन्हें भी गोपी बनने का भगवान् ने वरदान दिया है। मनोहरकाण्ड में रामोपासना का विधान वर्णित है। पूर्णकाण्ड में सोमवंशी राजाओं से युद्ध तथा सन्धि, कुश का अभिषेक और रामादि का वैकुण्ठा- रोहण वर्णित है। इस तरह यह रामायण भी रामचरित के वर्णन में पर्यवसित है। यह भी शतकोटिप्रविस्तर रामायण का ही अङ्ग एवं प्रामाणिक है। 🕮