रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 387, कुल 1049 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं कि स्वयंवर का आयोजन हो जो उनका धनुष चढ़ाने में समर्थ हो वही सीता का पति होने योग्य है। बहुत से राजा असफल होकर युद्ध करते हैं, किन्तु पराजय के बाद वे अपनी पुत्रियों को जानकी की सखी बनाने के लिए मिथिला में ले आते हैं। सीता राम का रूप धारण अपनी सखियों के साथ रास करती हैं (अध्याय ६)। नारद राम के पास जाकर सीता के वियोग का वर्णन करते हैं तथा उनके स्वयंवर का समाचार सुनाकर चले जाते हैं। शिव की प्रेरणा से विश्वामित्र राम तथा लक्ष्मण को मिथिला ले जाते हैं। वहाँ राम धनुष तोड़कर सीता को प्राप्त करते हैं। भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के भी विवाह होते हैं। ३—विवाह के पश्चात् राम की लीला (अध्याय ८-१५)। विवाह के बाद राम असंख्य कन्याओं के साथ विश्वकर्मा द्वारा निर्मित प्रासाद में निवास करते हैं। समय-समय पर विविध उत्सव मनाते हैं। वन में जाकर रास-लीला करते हैं। बुल्के के अनुसार गोप-कन्या, देव-कन्या, गन्धर्व-कन्या, किन्नर-सुता, विद्याधर-कन्या, सिद्धकुमारी, राज- कन्या, साध्य-कन्या, यक्ष-कन्या तथा नागकन्याओं के सङ्ग रासलीला के वर्णन प्रसङ्गों में कृष्ण की रासलीला का स्पष्ट अनुकरण किया गया है। उदाहरणार्थ राम का बहुत से रूप धारण करना, अन्तर्धान हो जाना, सीता की मान-लीला आदि।" वस्तुतः— "राम अनन्त अनन्त गुनानी। अगणित जन्म कर्म नामानी ॥" (रा० मा० ७।५१।२) तुलसीदासजी के अनुसार राम के अनन्त अवतार तथा अनन्त लीलाएँ हैं। किसी कल्प में राम ने भक्तों का मनोरथ पूर्ण करने के लिए रासलीला की है। राम ब्रह्मस्वरूप हैं। प्राणिमात्र उनके अनन्त माधुर्य पर मुग्ध होते हैं। "पितेव पुत्रस्य सखेव सख्युः प्रियः प्रियायार्हसि देव सोढुम्।" (गी० ११।४४) पुत्र पर पिता का जैसा, सखा पर सखा का जैसा एवं प्रिया पर प्रिय का जैसा भगवान् का अनुग्रह सब चाहते हैं। किसी कल्प में भगवान् राम ने अपने भक्तों की वाञ्छाएँ कृष्णावतार में पूरी की हैं और किसी कल्प में स्वयं अपने ही रूप में भक्तवाञ्छाकल्पद्रुम भगवान् ने भक्तवाञ्छा पूरी की है। इसमें कृष्ण के अनुकरण की कल्पना निराधार ही है। हिन्दुत्व में वर्णित रामकथा अनु० १९२ से अनु० २१०: हिन्दुत्व में प्रदर्शित रामायण में से महारामायण शङ्कर-पार्वती-संवादरूप ३,५०,००० श्लोकों का ग्रंथ है। इसमें कनकभवनविहारी राम की ९९ रासलीलाओं का वर्णन है। नारदकृत संवृतरामायण का विस्तार २४,००० श्लोकों का है। इसमें स्वायम्भुव मनु और शतरूपा की तपस्या तथा दशरथ और कौशल्या के रूप में आविर्भाव का वर्णन है। लोमशरामायण लोमश ऋषि की कृति में ३२,००० श्लोक हैं। इसमें राजा कुमुद और वीरवती के दशरथ तथा कौशल्या के रूप में जन्म का वर्णन है। अगस्त्यरामायण १६,००० श्लोकों का है। इसमें भानुप्रताप अरिमर्दन की कथा है तथा राजा कुन्तल और सिन्धुमती का दशरथ और कौशल्या के रूप में जन्म वर्णित है। मञ्जुलरामायण सुतीक्ष्णकृत १,२०,००० श्लोकों का है। इसमें भानुप्रताप अरिमर्दन की कथा तथा शबरी के प्रति राम द्वारा नवधा भक्ति का वर्णन है।