रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय तत्त्वसंग्रहरामायणादि की प्राचीनता ३११ अत्रिकृत सौपद्मरामायण ६२,००० श्लोकों का है। इसमें वाटिकाप्रसङ्ग वर्णित है। रामायणमहामाला शिव-पार्वती-संवादरूप ५६,००० श्लोकों का है। इसमें भुशुण्डि द्वारा गरुड़-मोहनिवारण वर्णित है। सौहार्दरामायण शरभङ्गकृत ४०,००० श्लोकों का है। इसमें राम और लक्ष्मण का वानरी भाषा समझने और बोलने का उल्लेख है। रामायणमणिरत्न वसिष्ठ-अरुन्धती-संवादरूप ३६,००० श्लोकों का है। इसमें मिथिला तथा अयोध्या में राम का वसन्तोत्सव मनाने का उल्लेख है। सौर्यरामायण में हनुमान् और सूर्य का संवाद वर्णित है। यह ६२,००० श्लोकों का है। इसमें शुकचरित्र तथा शुक का रजक बन कर सीतात त्याग का कारण बनना वर्णित है। चान्द्ररामायण ७५,००० श्लोकों का है। केवट के पूर्व जन्म की कथा इसकी विशेषता है। मैन्द रामायण मैन्द-कौरव-संवाद ५२,००० श्लोकों का है। इसमें वाटिकाप्रसङ्ग विस्तारपूर्वक वर्णित है। स्वायम्भुवरामायण ब्रह्म-नारद-संवाद १८,००० श्लोकों का है। इसमें मन्दोदरी के गर्भ से सीता के जन्म का वर्णन है। सुब्रह्मरामायण ३२,००० श्लोकों का है। सुवर्चरामायण सुग्रीव-तारा-संवाद १५,००० श्लोकों का है। इसमें सुलोचना की कथा, धोबी- धोबिन-संवाद तथा रावण के चित्र के कारण शान्ता की चुगली, शान्ता के प्रति सीता का शाप तथा उसकी पक्षी-योनि की प्राप्ति एवं महारावण का वध-वर्णन है। देवरामायण १,००,००० श्लोकों का है। इसमें इन्द्र और जयन्त का संवाद वर्णित है। श्रवणरामायण इन्द्र-जनक-संवादरूप १,२५,००० श्लोकों का है। इसमें मन्थरा की उत्पत्ति तथा चित्रकूट में भरत की यात्रा के समय जनक का आगमन वर्णित है। दुरन्तारामायण वसिष्ठ-जनकसंवादरूप ६१,००० श्लोकों का है। इसमें भरत की महिमा का वर्णन है। रामायणचम्पू शिव-नारद-संवादरूप १५,००० श्लोकों का है। इसमें शीलनिधि राजा के यहाँ स्वयंवर का वर्णन है। ये सभी कल्पभेद से प्रमाणकोटि में माने जाने चाहिये। ✤