रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 402, कुल 1049 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय आधुनिक भारतीय भाषाओं में रामकथा ३२५ विश्वामित्र को इस धोखे का ज्ञान नहीं हुआ । सीता आँगन लीपने के लिए शिव-धनुष उठाती हैं, लक्ष्मण बारह वर्ष तक उपवास रहे, राम की सहायता के लिए जाते समय लक्ष्मण सीता को राई के दाने देते हैं, उनके द्वारा सीता रावण को भस्म कर देती है, हनुमान् का शुकरूप में लङ्का-प्रवेश, राम और लक्ष्मण का हनुमान् की पूँछ पर चढ़कर समुद्र पार करना, लक्ष्मण द्वारा रावण का वध, पश्चात् कुम्भकर्ण का वध आदि वर्णित है। इन सब कथाओं में बहुत सी कथाएँ प्रचलित दन्तकथाओं के आधार पर हैं एवं बहुत सी अनुमान पर आधारित हैं। भरत और शत्रुघ्न तथा राम और लक्ष्मण का जोड़ा प्रसिद्ध होने से उन्हें परस्पर सहोदर होने की कल्पना की गयी है। बहुत सी पुराणों की कथाएँ भी उनमें सम्मिलित हुई हैं । मुण्डा जाति में एक दन्तकथा प्रचलित है जिसमें सीता की खोज का कुछ वर्णन है। बगुला राम की सहायता नहीं करता, अतः राम उसकी गर्दन खींच देते हैं। बेर वृक्ष राम को सीता की साड़ी के कुछ टुकड़े देता है और अमरत्व का वरदान प्राप्त करता है। गिलहरी सीता का मार्ग बताती है। राम उसकी पीठ पर तीन रेखायें खींच देते हैं । डा० डब्ल्यू रूबेन ने छोटा नागपुर की असुर नामक जाति में प्रचलित कथाओं का संकलन किया है। उसमें सीता की खोज और बगुले को दण्डित करने की कथा मिलती है। उसमें हनुमान् अपने ही बाण पर समुद्र पार करते हैं। नर्मदा घाटी की परधान जाति की दन्तकथा के अनुसार सीता लक्ष्मण के संयम की परीक्षा लेती हैं। २७६ वें अनु० में मध्यप्रदेश की बैगा-भूमिया जाति की दन्तकथा के अनुसार सीता कृषि की अधिष्ठात्री देवी से सम्बन्ध रखती है। सीता की छः अंगुलियाँ थी । सीता ने छठी अंगुली काटकर भूमि में रोप दी । उससे बाँस पैदा हुआ, जिसके काण्डों की गाँठों के बीच में सब प्रकार के बीज छिपे हुए थे। उस जाति में हनुमान् की एक जन्मकथा मिलती है जिसमें हनुमान् शिव के वीर्य से उत्पन्न माने जाते हैं । टी. वी. नायक ने आदिवासियों में प्रचलित रामायणविषयक दन्तकथाओं का सर्वेक्षण किया है। उनके निबन्ध में भिलोवीरामायण की चर्चा है। उसमें अगरिया जाति में प्रचलित सहस्रस्कन्ध रावण के वध की भी चर्चा है। २७८ अनु० : भारत के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों की एक कथा के अनुसार किसी राजा की पुत्री उसके हाथ के सूजन से पैदा हुई । एक आठ सिरवाले राक्षस ने उसका हरण कर लिया । राजा राक्षस को मार कर पुत्री को घर लाया । बाद में अन्य राक्षस उसे समुद्र पार ले गया । राजा उसकी खोज में निकला, सफल न होकर उसने वानरों के राजा से सहायता माँगी । वानरों का राजा राजकुमारी का पता लगाने के लिए राक्षस के गाँव पहुँचा । राक्षस ने उसकी पूँछ जलाने का प्रयत्न किया । उसने गाँव में दौड़कर सब घरों में आग लगा दी। लोगों की घबड़ाहट से लाभ उठा कर राजकुमारी को लेकर भाग निकला। उसे उसके पिता के पास ले गया। राजा ने वानर को सुनहला महल भेंट किया । महल में प्रवेश करते हुए वानर के बाल गिर गये । उसके चमड़े का रंग बदल गया । शरीर गोरा हो गया तथा वह प्रथम अंगरेज बना । ( द० बुलेटिन आफ दी ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट ( छिन्दवारा ), भाग १, अंक २) । नेपाली-साहित्य में रामकथा नेपालीसाहित्य में सबसे महत्वपूर्ण रचना भानुभट्टकृत रामायण है । यह अध्यात्मरामायण का पद्यानुवाद है, जो १८४२ ई० में पूर्ण हुआ था । इसके पूर्व रघुनाथ उपाध्याय ने रामायण-सुन्दरकाण्ड लिखा था । सिंहली रामकथा २८० अनु० : सिंहलद्वीप की रामकथा में राम अकेले ही वनवास करते हैं । उनकी अनुपस्थिति में सीता-हरण होता है । वाली हनुमान् का काम करता है । वही लङ्कादहन कर सीता को राम के पास ले आता है ।