भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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३३२ रामायणमीमांसा एकादश उर्दू-फारसी-साहित्य में रामकथा ३०७ अनु० : सूरजनारायण मेहरु का रामायणमेहरु, मुन्शी जगन्नाथ खुस्तर का रामायणखुस्तर । इस सर्वोत्तम तथा सबसे लोकप्रिय उर्दूरामायण की रामायणखुस्तर रचना १८४८ ई० में हुई । मुन्शी शङ्करदयाल 'फर्हत' का रामायणमंजूम, बाकेविहारीलाल 'बहार' का रामायणबहार । ये चार उर्दूसाहित्य की रामकथा के उल्लेखनीय ग्रन्थ हैं । उर्दू में रामायण पर अधिक रचनाओं का अभाव है । ३०८ अनु० : अकबर के आदेशानुसार अल बदायूनी ने १५८४-१५८९ ई० में वाल्मीकिरामायण का फारसी में पद्यानुवाद किया था । जहाँगीर के समय तुलसी के समकालिक गिरधरदास ने वाल्मीकिरामायण का संक्षिप्त पद्यानुवाद प्रस्तुत किया था । मुल्ला मसीह का रामायणमसीही, रामायणफैजी, गोपालकृत तर्जुमा-इ-रामायण १७वीं शती, बेदिल चन्द्रभान का वाल्मीकिरामायण-पद्यानुवाद, यह औरङ्गजेब के समय का है । लाला अमरसिंह का गद्यात्मक रामायणअमरप्रकाश १७०५ ई० । अमानत राय का वाल्मीकिरामायणपद्यानुवाद १६५४ ई० की रचना है । रामायणमसीही के निर्माता ईसाई थे, इसी लिए इसमें ईसा, मरियम आदि बाइबिल के पात्रों का उपमान के रूप में उल्लेख हुआ है । इसमें ५००० छन्द हैं । दशरथयज्ञ से लेकर सीता के भूमि-प्रवेश तक की समस्त रामकथा प्रस्तुत है । इसमें पाषाण-भूता अहल्या का उद्धार अरण्यकाण्ड में रखा गया है । विश्वामित्र सीता-जन्म की कथा सुनाते हैं । सीता मञ्जूषा में पायी गयी थी । रावण-वध के बाद स्वयं मन्दोदरी सीता को राम के पास ले आती है । राम की बहन सीता को दशमुख का चित्र अङ्कित करने के लिए प्रेरित करती है और वही राम से जाकर कहती है कि सीता उसी चित्र की पूजा करती रहती है । वाल्मीकि द्वारा सीता के एक पुत्र की सृष्टि, लवकुश-युद्ध में राम को भी पराजित तथा अचेत किया गया था, पर वाल्मीकि जल छिड़क कर राम को प्रबुद्ध करते हैं । प्राचीन लोग जान- बूझ कर किसी कथा को विकृत नहीं करते थे, उनको विभिन्न प्रमाणों से जैसी सामग्रियाँ मिलीं उसी रूप में उन्होंने रामकथा का संकलन किया । किन्तु आधुनिक बुल्के आदि तो अपना एक मत बना कर उसके आधार पर उसी के ढाँचे में रामायण का रूप निर्धारण करना चाहते हैं ।