भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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पृष्ठ 410

द्वादश अध्याय विदेशी रामकथा की चर्चा ३१० अनु० : रामकथा की एक धारा उत्तर की ओर फैल गयी । इसका प्रमाण तिब्बती तथा खोतानी रामायणों में मिलता है। वह अपेक्षाकृत प्राचीन है। दूसरी धारा भारत से हिन्दोनेशिया, हिन्दचीन, श्याम आदि की ओर पहुँच गयी । तिब्बती रामायण ३११ अनु० : अनामकं जातकं तथा दशरथकथानम् का क्रमशः तीसरी और ५ वीं शती में चीनी अनुवाद हुआ था । रामकथा की तिब्बती भाषा में भी अनेक हस्तलिपियां मिलती हैं, जिनमें रावणचरित से लेकर सीता-त्याग और राम-सीतामिलन तक की समस्त कथा मिलती है जो सम्भवतः ७ वीं शती की है। इसमें विष्णु दशरथ के पुत्ररूप में अवतार लेने की प्रतिज्ञा करते हैं। इसके अनुसार दशरथ की दो पत्नियां थीं। विष्णु कनिष्ठा के गर्भ से जन्म लेते हैं और रामन कहलाते हैं। तीन दिन बाद विष्णु के पुत्र ज्येष्ठा से जन्म लेते हैं जिसका नाम लक्ष्मण रखा जाता है। इसमें सीता रावण की पुत्री मानी जाती हैं। इसके अनुसार इस राजपुत्री की जन्मपत्री में पिता का नाश करने का योग देख कर उसे समुद्र में फेंक दिया जाता है। वह भारत के कृषकों द्वारा पाली जाती है। इसका लीलावती तथा अन्य लिपियों में सीता नाम पड़ता है। दो पुत्रों में से किस को राज्य दिया जाय ? पिता के इस संशय के कारण रामन स्वेच्छा से ही तप करने आश्रम में चले जाते हैं। कृषकों के अनुरोध से रामन तप छोड़कर सीता से विवाह करते हैं। तिब्बती रामायण में सीता-हरण का वर्णन वनवास के बाद मिलता है। इसमें रावण सीता का स्पर्श नहीं करता तथा जटायु को रक्त से सने पत्थर खिला कर मार डालता है। वानरों से मैत्री, हनुमान् का प्रेषण, रावण-वध, रावण का मर्म-स्थान उसका अंगूठा बताया गया है। इस तरह यह जैनों के उत्तरपुराण, कथासरित्सागर आदि से प्रभावित कथा है। खोतानी रामायण ३१२ अनु० : खोतान (पूर्वी तुर्किस्तान) की उक्त रामायण ९वीं शती की रचना मानी जाती है। यह तिब्बती रामायण से मिलती है। फिर भी दोनों में से कोई एक दूसरे का आधार नहीं है। तिब्बती रामायण का उत्तरकाण्ड खोतानी रामायण में नहीं मिलता । अन्य कई वृत्तान्त खोतानी रामायण में मिलते हैं जिनका अस्तित्व तिब्बती में नहीं है। दोनों में निम्नोक्त तुल्यता है— (१) राम और लक्ष्मण, केवल दो भाइयों का उल्लेख । (२) सीता (दशग्रीव-पुत्री) की जन्म-कथा । (३) वनवास के समय सीता के विवाह का वृत्तान्त । (४) रावण द्वारा जटायु को रक्त मिश्रित पाषाण भक्षण कराना । (५) द्वन्द्वयुद्ध के समय वानर विजेता की पूंछ में दर्पण बाँधे जाने की कथा । (६) रावण के मर्म-स्थान का उल्लेख ।