रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७२ रामायणमीमांसा द्वादश राम हनुमान् के कानों में कुण्डल देखते हैं, जिससे हनुमान् राम की सेवा स्वीकार करतें हैं, क्योंकि उनकी माता ने उनसे कहा था जब तुम अपना स्वामी देखोगे तभी तुम्हारे कान में कुण्डल दिखाई देंगे । हनुमान् के कुण्डलों का प्रसंग पाश्चात्य वृत्तान्त न० १, सेरीराम, रामकेर्ति तथा रामकियेन में भी मिलता है । अभी-अभी गत दिनों रूस में भारत तथा रामायण का रसियन भाषा में प्रकाशन वारेन्निकोव ने २००० वि० में ही तुलसीदास के रामचरितमानस का रूसी भाषा में अनुवाद किया है । रामचरितमानस का अनुवाद मराठी, गुजराती आदि के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं में भी प्रकाशित हुआ है । पाश्चात्य विद्वानों ने सुनी सुनायी वार्ता के अनुसार अधिकांश वृत लिखे हैं । भारत में ईसाई-धर्म-प्रचार के लिए मैक्समूलर ने वेदों का प्रकाशन अत्यावश्यक समझा था, क्योंकि उनकी दृष्टि से इससे हिन्दूधर्म की बहुत सी कमजोरियाँ विदित हो जायेंगी । इसी तरह ईसाई प्रचारकों को रामायण का विशेषतः विकृत रामकथा का प्रसार ईसाइयत के प्रचार में उपयुक्त प्रतीत हुआ होगा । ✱