रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपउमचरियं के पर्व २१-२२ में दशरथसम्बन्धी विस्तृत वंशावली और उनके नाम कल्पनाप्रधान हैं । वे नाम जैनों द्वारा परिकल्पित किसी जैन राम के लिए ही सङ्गत हो सकते हैं। वैदिक रामायण के राम के लिए नहीं । इसी तरह खोतानीरामायण के अनुसार सहस्रबाहु दशरथ के पुत्र तथा राम और लक्ष्मण सहस्रबाहु के पुत्र हैं, यह कल्पना भी कल्पना ही है। सेरीराम की नामावली के अनुसार नबी आदम, दशरथ रामन, दशरथ चक्रवर्ती तथा दशरथ नामावली भी कल्पनाप्रधान ही है। इसी तरह श्याम के जातक के अनुसार दशरथ को रावण का चाचा माना जाता है। ब्रह्मा के पुत्र तप्परमेस के दशरथ और विरूह्लोक (विश्ववा) दो पुत्र थे। तप्परमेस दशरथ को अच्छा योद्धा न समझकर अपने कनिष्ठ पुत्र विरूह्लोक को राज्याधिकारी बनाता है। दशरथ राज्य छोड़कर अपनी नयी राजधानी बनाते हैं। दशरथ का भतीजा रावण भी एक नयी राजधानी लङ्का बनाता है तथा दशरथ की पुत्री शान्ता को हर लेता है। दशरथ के दो पुत्र राम और लक्ष्मण अपनी बहन शान्ता के हरण का प्रतीकार करने के लिए रावण को पराजित करते हैं। रावण की राजधानी की यात्रा में तथा यात्रा की वापसी में राम और लक्ष्मण दोनों ही अनेक विवाह करते हैं। उन विवाहों से जो पुत्र उत्पन्न होते हैं वे दूसरे राम-रावण युद्ध में राम की सहायता करते हैं। बाद में रावण के साथ सन्धि की जाती है तथा रावण और शान्ता का विवाह सम्पन्न हो जाता है। इस भूमिका के पश्चात् ही रामायण की कथा प्रारम्भ होती है, जिसमें रावण द्वारा सीता-हरण के कारण राम और रावण का नया युद्ध छिड़ जाता है। किसी भी घटना के सम्बन्ध में जब अनेक प्रकार के परस्पर विरुद्ध वर्णन विभिन्न ग्रन्थों में मिलते हैं तो सुतरां कहना पड़ता है कि उनमें से एक वर्णन ही ऐतिहासिक तथ्य है अन्य सब अप्रामाणिक एवं कल्पनाप्रधान काव्य, नाटकादिवत् मनोरञ्जनार्थ या ऐतिहासिक तथ्य में भ्रान्तिजननार्थ ही हैं। अनादि अपौरुषेय वेदों एवं तदनुसारी वाल्मीकीय आदि रामायण, महाभारत तथा पुराणों के अनुसार वर्णित रामकथा ही वास्तविक रामकथा है। सर्वप्रथम बौद्धों और जैनों ने ही ऐतिहासिक तथ्यभूत रामकथा में भ्रमजननार्थ विकृत कल्पनाएँ की हैं। उसी का असर कुछ परवर्ती अन्य ग्रन्थों पर भी पड़ा है। परन्तु अधिकांश ग्रन्थों ने वाल्मीकीय रामायण का ही अनुसरण कर रामकथा का वर्णन किया है। थाईलैण्ड की रामकीर्ति में भी वाल्मीकीय रामायण का ही अधिकांश अनुसरण किया गया है। कुछ अन्य कल्पनाएँ भी हैं, पर वे वाल्मीकिरामायण के विरुद्ध नहीं हैं। दशरथ-पूर्वजन्म की चर्चा रामकथाओं में दशरथ के पूर्वजन्म की चर्चा तो वाल्मीकिरामायण से विरुद्ध न होकर उसकी पूरक ही है। वाल्मीकिरामायण के पूरक और समर्थक पुराणों द्वारा वर्णित दशरथ के पूर्वजन्म की कथा सत्य है। अन्य सब कल्पनामात्र ही हैं। दशरथ-विवाह आगे ३३७वें अनु० में दशरथ के विवाहों की चर्चा की गयी है। आनन्दरामायण (१।१।३२-७४) में दशरथ-कौशल्या विवाह का विस्तृत वर्णन है। उसके अनुसार दशरथ तथा कौशल्या के पुत्र तुम्हारा वध करेंगे यह बात ब्रह्मा से जानकर रावण सरयू में दशरथ की नौका तोड़कर उनको पराजित करता है। दशरथ तथा सुमन्त्र एक नौका-खण्ड के सहारे समुद्र की ओर बह जाते हैं। इतने में रावण कौशल्या को हर लेता है। उसे एक पेटिका में बन्द कर तिमिङ्गिल नामक मत्स्य की रक्षा में छोड़ देता है। तिमिङ्गिल उस पेटिका को एक द्वीप में रखकर अन्य मत्स्य से युद्ध करता है। दशरथ और सुमन्त्र उस द्वीप में पहुँचते हैं और पेटिका को देखकर उसे खोलते हैं। दशरथ कौशल्या से गान्धर्व विवाह करते हैं और तीनों पेटिका में छिप जाते हैं। अनन्तर रावण ब्रह्मा के सामने उनकी