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रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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पृष्ठ 453

३७६ रामायणमीमांसा त्रयोदश भविष्यवाणी को मिथ्या बतलाता है। ब्रह्मा से यह सुनकर कि दशरथ और कौशल्या का विवाह हो चुका है, रावण पेटिका मँगवाता है। उसको खोलकर कौशल्या, दशरथ तथा सुमन्त्र को देखता है। ब्रह्मा रावण को तीनों का वध करने से रोक देते हैं। वह पेटिका साकेत भेज दी जाती है, जहाँ सुमित्रा आदि अन्य सात सौ स्त्रियाँ दशरथ से विवाह करती हैं। भावार्थरामायण (५।९), पाश्चात्य वृत्तान्त नं० १३, स्वायम्भुवरामायण तथा रामचरितमानस के कुछ संस्करणों में इस कथा का उल्लेख है। आनन्दरामायण प्रामाणिक ग्रन्थ है, भावार्थरामायण भी प्रामाणिक ग्रन्थों पर ही आधृत है और उक्त कथा वाल्मीकिरामायण के विरुद्ध न होकर उसकी पूरक ही है। अतः उक्त वृत्तान्त आस्तिकों को मान्य ही है। जैसे वाल्मीकीय रामायण आर्ष ग्रन्थ है वैसे ही महाभारत, हरिवंश, विष्णुपुराण आदि भी हैं, अतः उनका भी प्रामाण्य आस्तिकों द्वारा स्वीकृत है। पउमचरियं के अनुसार पद्म (राम) की माता का नाम अपराजिता था। वह अरुहस्थल के राजा सुकोशल तथा अमृतप्रभा की पुत्री थी। गुणभद्र के उत्तरपुराण के अनुसार राम की माता सुबाला थी। पूर्वजन्मसम्वन्धी कथाओं में कौशल्या को पूर्वजन्म की अदिति तथा शतरूपा माना गया है। वाल्मीकिरामायण में केकयराज-पुत्री कैकेयी के स्वयंवर की बात नहीं मिलती। पउमचरियं में (पर्व २४) इस स्वयंवर का प्रथम वर्णन हुआ है। इसके अनुसार कौतुकमङ्गल नगर के राजा शुभमति तथा उनकी पत्नी पृथ्वीश्री की पुत्री कैकेयी के स्वयंवर का आयोजन किया गया था। उस समय दशरथ तथा जनक रावण के भय से गुप्तवेश में भ्रमण कर रहे थे। संयोग से कैकेयी के स्वयंवर में पहुँच गये। कैकेयी ने दशरथ को चुन लिया। दशरथ का अन्य राजाओं से युद्ध होने लगा। उस समय कैकेयी ने राजा का रथ हाँका था। राजा ने रथ हाँकने के बदले में पुरस्काररूप से वर प्रदान किया। कैकेयी ने कहा जब आवश्यकता होगी तब माँग लूँगी। कृत्तिवासरामायण (१।२५) के अनुसार गिरिराज नगर में आयोजित कैकेयी के स्वयंवर में पृथ्वी भर के राजा निमन्त्रित थे, किन्तु उसमें युद्ध का उल्लेख नहीं है। असमीया बालकाण्ड (८।१०) में भी कैकेयी के स्वयंवर का वृत्तान्त मिलता है। सत्योपाख्यान के अनुसार किसी दिन नारद ने दशरथ के पास पहुँच कर कैकेयी के सौन्दर्य की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि कैकेयी की हस्तरेखा के अनुसार उसे एक महान् पुत्र उत्पन्न होगा। बाद में दशरथ ने एक देवयोगिनी को कैकेयी के पास भेजा। उसने दशरथ की प्रशंसा कर दशरथ की पत्नी बनने की इच्छा उसके मन में पैदा की। कैकेयी विरह के कारण उदासीन हो जाती है। माता उसकी उदासीनता का कारण जानकर केकयराज से दशरथ-कैकेयी विवाह का अनुरोध करती हैं। केकयराज ने दशरथ को बुलाकर कैकेयी से विवाह कर दिया और कैकेयी के पुत्र को राज्य अवश्य दिया जाय यह भी कहा। कैकेयी केकयराज की कन्या थी यह अश्वमेध के आयोजन के प्रसङ्ग में वाल्मीकिरामायण में वर्णित है। अन्य अंश की पूर्ति आर्षग्रन्थों से करनी उचित है। पउमचरियं आदि की कल्पना रामायण से ठीक विपरीत दिशा की ओर चलती है। पउमचरियं के अनुसार उसका मुख्य नायक पद्म ही है। पद्म में ही जैन विद्वान् राम का आरोप करते हैं, परन्तु उनके पात्र इनसे पृथक् और विचित्र नामों के हैं। उनका मेल-जोल रामायण से नहीं मिलता है। रामायण की कथाओं को विकृत रूप में उपस्थित करना उनकी विशिष्ट शैली है। उनके ग्रन्थों में वाल्मीकिरामायण के वर्णनों का उल्लेख कर खण्डन भी किया गया है। अतः रामायणप्रेमियों को पउमचरियं आदि से दूर ही रहना उचित है। ३३९ वाँ अनु०: सुमित्रा के सम्बन्ध में रघुवंश से विदित होता है कि वह मगधनरेश की पुत्री थी (रघुवंश ९।१७) यही प्रामाणिक है। पउमचरियं के अनुसार (१२।१०७, १०८) कमलसंकुलपुर के राजा सुबन्धुतिलक की कैकेयी नाम की पुत्री थी; दशरथ ने उससे विवाह किया और उसका नाम सुमित्रा रखा।