रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय बालकाण्ड ३८१ इससे स्पष्ट है कि गौडीय तथा पश्चिमोत्तरीय पाठ के अनुसार शान्ता दशरथ की ही पुत्री थी, जिसे दशरथ ने लोमपाद को दत्तकरूप में प्रदान किया था। श्रीबुल्के के अनुसार उदीच्य पाठों की यह धारणा दाक्षिणात्य पाठ की द्व्यर्थता से उत्पन्न तो हो सकी है, किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि इसका वास्तविक कारण अन्यत्र ढूंढ़ना चाहिए। हरिवंश, मत्स्यपुराण, वायुपुराण तथा ब्रह्मपुराण के अनुसार अङ्गराज चित्ररथ के दो नाम थे दशरथ तथा लोमपाद, अतः शान्ता पहले अङ्गराज दशरथ की पुत्री मानी गयी थी; किन्तु अयोध्यानरेश अज-पुत्र दशरथ कहीं अधिक विख्यात थे, शान्ता बाद में उन्हीं दशरथ की पुत्री मानी जाने लगी। “अथ चित्ररथस्यापि पुत्रो दशरथोऽभवत् । लोमपाद इति ख्यातो यस्य शान्ता सुताऽभवत् ॥” (ह० व० १।३१।४६) परवर्ती रचनाओं, में बहुधा अयोध्यानरेश दशरथ की पुत्री शान्ता का उल्लेख किया गया। उदाहरणार्थ विष्णुपुराण (४।१२।१६), भवभूति का उत्तररामचरित (अङ्क १ की प्रस्तावना ), स्कन्दपुराण (नागरखण्ड अध्याय ९८) पद्मपुराण (पातालखण्ड अ० १२) आनन्दरामायण (१।१।१६,१७), असमिया बालकाण्ड (अ० १८), मराठी भावार्थरामायण तथा सारलादास का उड़िया महाभारत । भावार्थरामायण में इन्द्र दशरथ को शान्ता तथा ऋष्यशृङ्ग का विवाह सम्पन्न करने का परामर्श देते हैं (१।१) । गोविन्दराज ने ( १।९।१९) उद्धरण में शान्ता को दशरथ की औरसी पुत्री माना है। इसी प्रकार सर्ग ११ में रोमपाद तथा दशरथ के जो 'सम्बन्धकम्' का उल्लेख है उसका रामवर्मा तथा गोविन्दराज यह अर्थ करते हैं कि शान्ता दशरथ की पुत्री थी जिसे उन्होंने रोमपाद को प्रदान किया था (वा० रा० १।११।१८) । कृत्तिवास रामायण ( १।२९ ) के अनुसार दशरथ ने निःसन्तान लोमपाद को अपनी पहली सन्तान देने की प्रतिज्ञा की थी। अतः जब उनकी पत्नी (भार्गव राजा की पुत्री) एक कन्या को जन्म देती है, दशरथ उसका नाम हेमलता रखकर उसे लोमपाद के यहाँ भेजते हैं। बाद में हेमलता के नाम का उल्लेख नहीं मिलता है। किन्तु दशरथ की कन्या का नाम शान्ता ही माना जाता है। बङ्गाल की रामकथाओं में दशरथ की पुत्री का प्रायः उल्लेख मिलता है। अद्भुताचार्य के रामायण में इनका नाम शान्ता ही है, किन्तु चन्द्रावतीकृत रामायण में कुकुआ नाम की कैकेयी की एक पुत्री की चर्चा है (दे० दिनेशचन्द्र सेन पृ० १९७) । सुवर्चँस् रामायण में शान्ता के प्रति सीता के शाप तथा उसके पक्षी योनि प्राप्त करने की कथा पायी जाती है। विदेश की कुछ ही कथाओं में दशरथ की पुत्री का उल्लेख है। हिन्दोनेशिया के सेरीराम में इनका नाम कीकवी है और वह भरत और शत्रुघ्न की सहोदरी मानी जाती हैं। श्याम के रामजातक तथा पालकपालाम में दशरथात्मजा शान्ता का विवाह रावण से होता है। दशरथजातक में सीता को दशरथ की पुत्री माना जाता है। माधवदासकृत विचित्ररामायण के अनुसार शान्ता की उत्पत्ति निम्नोक्त प्रकार से हुई है, दशरथ ने इन्द्र के यहाँ जाते समय उतावली के कारण गोमाता तथा मुनि ताराक्ष्य की अवज्ञा की थी और मुनि ने उन्हें निःसन्तान होने का शाप दिया था। लौटते समय दशरथ मुनि से मिले। दशरथ की अनुनयविनय को सुनकर मुनि ने शाप बदल कर कहा तुम्हारी पहली सन्तान एक लड़की होगी; तुमको उसे ऋष्यशृङ्ग को देना चाहिये। ऋष्यशृङ्ग से यज्ञ कराने से तुम्हें पुत्र उत्पन्न होंगे। बाद में शान्ता के स्वयंवर के अवसर पर परशुराम आ पहुँचते हैं तथा ऋष्यशृङ्ग के साथ कन्या का विवाह कराने का आदेश देते हैं। इस पर एक वेश्या को भेजकर ऋष्यशृङ्ग को बुलाया जाता है और उनके साथ शान्ता का विवाह सम्पन्न किया जाता है। श्रीबुल्के के अनुसार दाक्षिणात्य पाठ के अनुसार शान्ता दशरथ की पुत्री नहीं है, परन्तु द्व्यर्थकता से उदीच्य पाठों की यह धारणा बनी कि शान्ता दशरथ की पुत्री है। परन्तु उनके