भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( ६ ) परम पितृभक्त एवं सत्यनिष्ठ राम के द्वारा यह कैसा धर्मबन्धन था, यह सरासर मूर्खता का बन्धन नहीं था आदि अनार्य शब्द कहलाना कौसल्यायन का चरम अनौचित्य १११ इस बौद्ध की रामकहानी में भूल से ही शायद कोई एक आध बात सत्य निकले प्रायः सब बातें मनगढ़न्त दुष्कल्पनापूर्ण हैं ११२ जैन-मत में रामकथा १२८ विमल सूरि आदि का काल १२९ पउमचरियं की विस्तृत रामकथा १२९ अनेक जैन लेखकों द्वारा लिखित विकृतिमय रामकथा १३० रावणचरित १३० रावण-बालि-संघर्ष १३० धर्मान्तरण १३७ जैन अग्नि परीक्षा पुस्तक का परिचय १४५ बिना अपवाद के भी अग्नि-परीक्षा सम्भव १४७ वाल्मीकि के अनुसार सीता की अग्निशुद्धि १५५ वैदिक रामकथा और अग्निपरीक्षा १६० राम पर बहुपत्नीत्वारोप सर्वथा निराधार १६१ बौद्ध जातक साहित्य की रामकथाओं पर विचार १६३ शाक्यों की उत्पत्ति १६८ कोलियों की उत्पत्ति १६८ जयद्दिसजातक की कथाएँ १७२ सामजातक रामायण की प्रतिच्छाया १७२ वेस्संन्तरजातक १७३ संबुलाजातक १७४ महासुतसोमजातक १७५ जातकों के साहित्य से वाल्मीकि ने सामग्री ली दिनेशचन्द्र सेन के इस मत की प्रमाणशून्यता १७५ जातकों में रामकथा से सम्बन्धित सामग्री १७६ रामायण का आधार गाथाओं में ढूँढना व्यर्थ, उसके आधार प्राचीन रामकथा सम्बन्धी आख्यान काव्य— बुल्के का मत १७६ वाल्मीकि रामायण के आधार के सम्बन्ध में दिनेशचन्द्र सेन का अनुमान १७७ डॉ० ह्वीलर का मत १७७ राक्षस बौद्ध नहीं थे—बुल्के का मत १७७ दिनेशचन्द्र सेन तथा डॉ० ह्वीलर के मतों का बुल्के द्वारा खण्डन १७७ वेद-प्रामाण्यबाधक होने के ही कारण चोरतुल्य बौद्धादि नास्तिक दण्डनीय कहे गये हैं १७८ षष्ठ अध्याय रामायण के मूल स्रोत के सम्बन्ध में निराधार कल्पनाएँ १७९–२२२ डॉ० बेबर का मत १७९ डॉ० याकोबी का मत १७९