भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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श्रीबुल्के कहते हैं, "महाभारत में परशुराम की कथा अनेक स्थलों में वर्णित है, किन्तु इसमें कहीं भी उनके विष्णुत्व की ओर संकेत नहीं मिलता । फिर भी नारायणीयोपाख्यान में (म० भा० १२।३२६।७७), हरिवंश ( १।४१ ११२-१२०; २।२२।२-४८, ) विष्णुपुराण ( १।९।१४३ ), भागवतपुराण ( १।३।२०; २।७।२२ ) में उनका अवतारों में उल्लेख विद्यमान है ।" परन्तु बुल्केजी भारतीय विचार-पद्धति से बिलकुल अपरिचित हैं, अतएव आर्ष ग्रन्थों के समन्वय का दृष्टिकोण उन्हें विदित नहीं है और मान्य भी नहीं है । नारायणीयोपाख्यान में जो अंश है उसका अन्य स्थलों के साथ समन्वय ही अभीष्ट है । विष्णुपुराण आदि भी आर्ष ग्रन्थ एवं प्रमाण ही हैं । यदि विष्णुपुराण आदि में परशुराम को स्पष्टरूप से विष्णु का अवतार कहा गया है और महाभारत में भी नारायणीयोपाख्यान में परशुराम का विष्णु अवतार होना भी प्रसिद्ध ही है फिर भी महाभारत के ही कई स्थलों में उनका विष्णुत्व-वर्णन न होने से परशुराम विष्णु के अवतार नहीं हैं यह कैसे कहा जा सकता है ? यह स्पष्ट जान लेना चाहिये कि केवल

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