भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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रामकथा की लोकप्रियता राम के स्वाभाविक महत्त्व, परमेश्वरत्व तथा मर्यादामयी लीलाओं के कारण २४७ अनन्तगुण राम के गुणों का वर्णन अपनी शक्ति के अनुसार ब्रह्मादि तथा साधारण जन करते हैं पर उनका अन्त कोई नहीं पाता २४८

अष्टम अध्याय

अवतार-सामग्री २४९-२८७ शतपथ ब्राह्मण के वचनों से मत्स्यावतार की सिद्धि २४९ महाभारत के वचनों द्वारा कूर्मावतार का वर्णन २४९ महाभारत के ही वचनों द्वारा परशुराम, राम, बलराम, कृष्ण तथा हंस, कूर्म, मत्स्य आदि अव- तारों का वर्णन २५० भगवान् विष्णु ही प्रजापति, ब्रह्मा आदि शब्दों से उक्त २५१ मत्स्य, कूर्म, वराह आदि विष्णु के ही अवतार २५१ शास्त्रों के आधार पर ही विष्णु का महत्त्व, वह किसी की इच्छा या भावना से घटता या बढ़ता नहीं २५१ महाभारत, हरिवंश, विष्णुपुराण आदि प्रामाणिक ग्रन्थों में प्रजापति और विष्णु को एक (अभिन्न) मानकर मत्स्यादि सब अवतार विष्णु के उक्त ही हैं फिर हठधर्मिता क्यों ? २५१ ब्राह्मण ग्रन्थों तथा प्राचीन साहित्य में अवतारवाद के विद्यमान होने पर भी उन ग्रन्थों के रचनाकाल में न तो उनकी पूजा होती थी और न विष्णु का प्राधान्य ही था, यह कथन असंगत २५२ यज्ञ-यागों में देवताओं के रूप में प्रजापति तथा विष्णु का उल्लेख मौजूद कई स्थलों पर विष्णु और इन्द्र का साथ २ देवत्व एवं कई स्थलों पर विष्णु का प्राधान्य २५२ ब्राह्मणों द्वारा भागवतों के इष्टदेव कृष्ण को नारायणावतार मान लेने से अवतारवाद को प्रोत्साहन उससे विष्णु के महत्त्व की वृद्धि एवं अवतार की सारी भावना विष्णु पर केन्द्रित आदि कथन निष्प्रमाण २५२ नारायणीयोपाख्यान, भागवत तथा रामायण में वेद, यज्ञ तथा ब्राह्मणों का प्रभूत महत्त्व वर्णित होने से भागवतों के भक्तिसम्प्रदाय को बौद्धों के तुल्य वेद, यज्ञ और ब्राह्मण विरोधी समझना निरी भ्रान्ति २५३ विष्णुपुराण आदि ग्रन्थ ब्राह्मण सम्प्रदाय की स्वार्थपूर्ण कल्पना नहीं, किन्तु महर्षि व्यास द्वारा वेदार्थोपबृंहण या वेदभाष्यरूप में रचित २५३ पहली शती ई० पू० से रामावतार की भावना प्रचलित होने लगी, रामायण के प्रक्षेपों के अतिरिक्त महाभारत, वायु, ब्रह्माण्ड, विष्णु, मत्स्य, हरिवंश आदि प्राचीनतम पुराणों में अवतारों की तालिका में राम के नाम का अस्तित्व, यह कथन नितान्त भ्रम तथा दुरभिसन्धिपूर्ण, क्योंकि वेदों, उपनिषदों में अनादिकाल से रामावतार तथा उनकी उपासना वर्णित २५३ भारतीय साहित्य के अनुसार राम विष्णु के अवतार ही नहीं, किन्तु अनन्तानन्त ब्रह्मा, विष्णु तथा रुद्रों की राम के अंश से उत्पत्ति २५४