रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय बालकाण्ड ४४१ विवाहोत्सव वाल्मीकिरामायण बालकाण्ड के अनुसार राम के विवाह के साथ लक्ष्मण का ऊर्मिला से, भरत और शत्रुघ्न का क्रमशः माण्डवी और श्रुतकीर्ति से विवाह होता है। गुणभद्र के उत्तरपुराण, तिब्बती रामायण, खोतानी रामायण तथा बौद्ध जातकों में सीता और राम का ही विवाह वर्णित है। भट्टिकाव्य, सेरीराम, रामकेलि, रामकियेन आदि में राम और लक्ष्मण का विवाह वर्णित है। वह्निपुराण और पद्मपुराण (गौडीय पातालखण्ड) में राम और भरत का विवाह वर्णित है। राम और सीता के विवाह के कारण भरत को उदास देखकर कैकेयी ने भरत और सुभद्रा के विवाह का प्रस्ताव किया। सुभद्रा जनक के भाई कनक की कन्या है। इसपर सुभद्रा के स्वयंवर का आयोजन होता है। स्वयंवर में सुभद्रा भरत को चुनती है। तत्त्वसंग्रहरामायण में विवाह में ब्रह्मा की उपस्थिति का उल्लेख है। रामचरितमानस में देवता ब्राह्मण का रूप धारण कर विवाह में भाग लेते हैं। होम के समय पूजा स्वीकार करते हैं। "सिव ब्रह्मादिक बिबुध बरूथा। चढ़े बिमानहिं नाना जूथा ॥ प्रेमपुलक तन हृदय उछाहू । चले बिलोकन राम बिआहू॥" (रा० मा० १।३१३।१,२) "ब्रह्मादि सुरवर विप्रवेष बनाई कौतुक देखहीं ॥" (रा० मा० १।३१९ छन्द) उनकी स्त्रियां छद्मवेश में परछन के समय राम की आरती उतारती हैं। "सची सारदा रमा भवानी। जे सुरतिय सुचि सहज सयानी । कपटनारि बर बेष बनाई । मिली सकल रनवासहिं जाई ॥" (रा० मा० १।३१७।३,४) कृत्तिवासरामायण में चन्द्रमा ने नर्तकी का रूप धारण कर अपने नृत्य से सबको मन्त्रमुग्ध कर दिया, जिससे शुभ मुहूर्त्त टल गया जिसे देवता चाहते थे (१।६२)। अतएव लौकिक दृष्टि से वह विवाह सुखदायक नहीं हुआ। इसी के आधार पर अन्य कल्पनाएँ हुई हैं। विवाह की अवस्था वाल्मीकिरामायण में उक्त 'ऊनषोडशवर्षः (१।२०) के अनुसार राम की १६ वर्ष से कम उम्र थी एवं (वा० रा० १।७७।१४) तथा अनसूयासंवाद (वा० रा० २।११८।२७-५२) के अनुसार सीता की पतिसंयोगसुलभ अवस्था का उल्लेख है। पर बुल्के इसे और अनसूया-संवाद को प्रक्षेप कहते हैं, परन्तु उनकी यह कल्पना भी निराधार ही है। क्योंकि भारतीय टीकाकारों ने उसे परम्पराप्राप्त मानकर ही उसपर टीकाएँ की हैं। अरण्यकाण्ड (३।४७) के अनुसार विवाह के पश्चात् सीता १२ वर्ष तक अयोध्या में रही थीं। वनगमन के समय राम और सीता की अवस्था क्रमशः २५ तथा १८ की थी (वा० रा० ३।४७।१०-११)। विवाह के समय राम तथा सीता की उम्र १३ और ६ वर्ष की थी। अयोध्याकाण्ड के (वा० रा० २।२०।४५) के अनुसार राम की अवस्था १७ वर्ष की थी। (वा० रा० ५।३३।१७) में वनवास के पहले १२ वर्ष अयोध्या में रहना कहा गया है। स्कन्दपुराण (ब्राह्मखण्ड धर्मारण्यखण्ड अ० ३०) तथा पद्मपुराण (पातालखण्ड अ० ३३) में विवाह के समय दोनों की उम्र क्रमशः १५ और ६ वर्ष की मानी गयी है। बुल्के उन सबमें परस्पर मतभेद भी दिखला कर प्रक्षेप सिद्ध करना चाहते हैं। परन्तु वस्तुतः इन सबका समन्वय ही है। सीता अयोनिया एवं दिव्य होने के कारण ६ वर्ष की अवस्था में भी पतिसंयोगसुलभ प्रतीत होती थीं। 'ऊनषोडशवर्षः' यह वचन कहकर दशरथ ने विश्वामित्र से यह कहना चाहा था कि १६ वर्ष का क्षत्रिय- पुत्र युद्धयोग्य होता है, किन्तु राम अभी षोडश वर्ष के नहीं हुए, अतः युद्ध के अयोग्य हैं। उपक्रमन्याय से बालकाण्ड ५६