रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १५ ) लक्ष्मण का विद्रोह और पश्चात्ताप ४७६ उक्त कथा का तीर्थों के माहात्म्य-वर्णन में तात्पर्य ४७९ सेवाधर्म की परम गहनता ४७९ आर्ष इतिहास वाल्मीकिरामायण द्वारा वर्णित लक्ष्मण-स्वरूप तथ्य ४७९ शूर्पणखा का वृत्तान्त ४८० खर और दूषण शूर्पणखा के भाई ४८० शूर्पणखा के पति विद्युज्जिह्व का अज्ञानतः रावण द्वारा वध ४८० शूर्पणखा के सम्बन्ध में पउमचरियं की विकृति ४८० शूर्पणखा के पुत्र शम्बूक का लक्ष्मण द्वारा वध ४८० सारलादास के महाभारत के अनुसार लक्ष्मण शूर्पणखा से विवाह करें, इस विषय में सीता की इच्छा तथा राम की सहमति ४८० सीता पर आक्रमण करने के अनन्तर राम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के नाक और कान काटना ४८१ विरूपित शूर्पणखा का खर के पास जाना ४८१ १४ हजार राक्षसों सहित खर और दूषण का अकेले राम द्वारा वध ४८१ जटायु का वृत्तान्त ४८२ जटायु राम का पूर्वपरिचित ४८२ जटायु और रावण का युद्ध ४८२ जटायु का सीता का रावण द्वारा अपहरण वृत्तान्त राम से कहकर प्राणत्याग ४८३ राम द्वारा जटायु का दाह संस्कार और उसे स्वधाम प्रदान ४८३ सीता की खोज ४८४ कबन्धवध ४८४ शबरी से भेंट ४८५ शबरी द्वारा राम और लक्ष्मण का आतिथ्य सत्कार ४८६ भक्ति में पुरुषत्व तथा स्त्रीत्व जाति का कोई महत्त्व नहीं ४८७ महर्षि मतङ्ग द्वारा श्रमणी शबरी को रामभक्ति की दीक्षा प्रदान ४८८ शबरी भिल्लिनी नहीं थी, शबरी उसका नाम था, वह भक्त थी ४८८ सीताहरण का मुख्य कारण सीता-सौंदर्य ४८९ सत्यसन्ध राम का तपस्वी के रूप में धनुष धारण प्रतिज्ञात ऋषिजन रक्षण के लिए ४९० कनकमृग-कथा, हिन्दीग्रन्थों में न मिलने से, प्रक्षेप नहीं ४९२ सीताहरण के विषय में वाल्मीकिरामायणविरुद्ध कथाएँ विकृति ४९८ छाया सीता का रावण द्वारा अपहरण ५०० असली सीता का अग्नि में अन्तर्धान ५०१ षोडश अध्याय किष्किन्धाकाण्ड ५०४-५१८ किष्किन्धा काण्ड की कथावस्तु का विश्लेषण ५०४