भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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४८४ रामायणमीमांसा पञ्चदश पउमचरियं के अनुसार दण्डक ही जटायु था । वाल्मीकिरामायण उत्तरकाण्ड के अनुसार जिसने उशना की पुत्री अरजा से बलात्कार किया था, जिसे भार्गव के शाप से इन्द्र ने समस्त राज्य के साथ भस्म कर दिया था एवं जिससे दण्डकारण्य प्रसिद्ध हुआ था । पउमचरियं के अनुसार दण्डक एक श्रमण का धैर्य देख कर श्रमणों का आदर करने लगा । किसी यात्री ने निर्ग्रन्थक मुनि का वेष धारण कर अन्तःपुर में अनधिकार प्रवेश किया । राजा ने क्रोध में आकर सब श्रमणों को यन्त्र में पेरने का आदेश दिया । एक श्रमण ने क्रोधाग्नि से समस्त शहर को भस्म कर दिया । दण्डक भटक-भटक कर मर गया तथा इस गीध के रूप में प्रकट हुआ । अन्त में मुनि ने गीध को सदुपदेश दिया । वह श्रावक धर्म में सम्मिलित हुआ । मुनि ने सीता से निवेदन किया कि वह उसकी रक्षा करें । उसके सिर की जटाएँ देखकर राम ने उसे जटायु कहा । रामायण, महाभारत तथा पुराणों की कथाओं को विकृत रूप में वर्णन करने का यह भी एक उदाहरण है । सीता की खोज ४७३ वें अनु० में सीता की खोज पर विश्लेषण है । वाल्मीकिरामायण की कथावस्तु का संक्षिप्त वर्णन है । बुल्के के अनुसार अयोमुखी-वृत्तान्त शूर्पणखा के वृत्तान्त की आवृत्ति मात्र है । पर यह कथन निरर्थक है, क्योंकि दो सामान्य घटनाओं का होना असम्भव नहीं है । कबन्ध राम और लक्ष्मण द्वारा भुजाएँ काटी जाने के बाद भूमि पर गिर गया । अनन्तर उसने दो शापों का उल्लेख किया । कबन्ध भयानक रूप धारण कर ऋषियों को सताया करता था । स्थूलशिरा ऋषि ने उसे शाप दिया कि तुम यही भयंकर रूप धारण किये रहो । विनय करने पर उन्होंने कहा—जब राम तुम्हारी भुजाएँ काटकर तुम्हारा शरीर जला देंगे तब फिर तुम शुभ रूप ग्रहण करोगे । दूसरी कथा के अनुसार वह दनु का सुन्दर पुत्र था । उग्र तप से उसने दीर्घायु होने का ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया । इन्द्र के वज्र से उसका सिर उदर में धँस गया । ब्रह्मा के वरदान को ध्यान में रखकर इन्द्र ने उसे एक योजन लम्बी भुजाएँ देकर उदर में मुख बनाकर आश्वासन दिया कि राम और लक्ष्मण द्वारा तुम्हारी भुजाएँ काटी जाने पर तुम स्वर्ग पाओगे । राम-लक्ष्मण द्वारा जलाये जाने पर चिता से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुआ । उसने राम को सुग्रीव के पास जाने का परामर्श दिया । रामोपाख्यान में इसी का संक्षिप्त वर्णन है । पर उसके अनुसार वह दिव्य रूप धारण करके कहता है कि मैं विश्वावसु गन्धर्व हूँ । ब्रह्मशाप से राक्षस बना था । रावण ने सीताहरण किया है । अध्यात्मरामायण तथा आनन्दरामायण के अनुसार भी वह रूप-यौवनदर्पित गन्धर्व था । अष्टावक्र का उपहास करने पर वह राक्षस हुआ । इन्द्र के वज्र से उसकी उक्त अवस्था बनी । उसने राम को शबरी के पास जाने का परामर्श दिया ( अ० रा० ३।१०।१-३ ) । मानस के अनुसार वह दुर्वासा के शाप में कबन्ध-गति को प्राप्त हुआ ( रा० मा० ३।३३ ) । इन आर्ष कथाओं का कल्पभेद से ही समाधान करना युक्त है । जैसे जय और विजय तथा शिवजी के गण तथा प्रतापभानु आदि विभिन्न कल्पों में रावण हुए थे वैसे ही प्रकृत में भी समझना चाहिये । सेरीराम में दो पक्षियों की कथा है । एक राम का उपहास करता है, दूसरा सहायक बनता है । पहले की चार पत्नियां हैं । वह कहता है कि राम अपनी एक पत्नी की भी रक्षा नहीं कर पाये । इसपर राम उसे अन्धा बना देते हैं, जिससे उसकी पत्नियां चली जाती हैं । अन्य पक्षी रावण द्वारा सीता हरण का समाचार देता है । वरदान में वह लम्बी ग्रीवा मांगता है जिससे सुगमता से भोजन प्राप्त कर सके । उसे एक बालक फँसा कर बाजार में बेचने जाता है । राम उसे अपनी अंगूठी देकर खरीद लेते हैं । राम लम्बी ग्रीवा के बदले उसे चार मादाएँ प्रदान करते हैं जो उसके लिए भोजन ले आती रहेंगी । बुल्के के अनुसार भारतीय आदिवासी वृत्तान्तों में यह कथा मिलती है । बलरामदास की रामायण के अनुसार राम ने पम्पासरोवर में चक्रवाक-चक्रवाकी को क्रीड़ा करते देखकर पास जाकर सीता का समाचार पूछा । उसने निन्दा करते हुए कहा कि तुम यह भी नहीं जानते कि इस समय बाधा