रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय अरण्यकाण्ड ४८५ डालना अनुचित है। राम ने शाप दिया कि तुम दोनों का मिलन कभी न होगा। आराधना करने पर राम ने शापानुग्रह किया कि दिन में ही तुम्हारा मिलन होगा। रात में तुम विरह सन्तप्त रहोगे। किसी व्याध ने दोनों को फँसा कर एक टोकरी में बन्द कर दिया। वे कहने लगे कि हमारे साथ रहने से राम का कथन असत्य हो जायगा। किन्तु रात के पूर्व ही टोकरी अपने आप खुल गयी, दोनों अलग हो गये (अरण्यकाण्ड में)। किष्किन्धाकाण्ड में माल्यवान् पर्वत पर विरही राम को देखकर बगुले ने कहा तुम कैसे महात्मा हो जो रोते हो ? राम ने सीता का समाचार पूछा तो उसने आश्वासन दिया। लङ्का का रावण सीता को ले गया है। उनको मैंने रोते देखा है। उनका अश्रुजल मुझपर पड़ा और मैं सफेद हो गया। दुर्गा मुझपर प्रसन्न होंगी और फिर सीता मिल जायगी। राम ने उसे वर दिया तो उसने कहा कि वर्षा में भोजन मिलने की कठिनाई पड़ती है। मुझे यहाँ बैठे-बैठे आहार मिलना चाहिये । राम ने कहा कि तुम्हारी मादा बरसात में भोजन ला देगी। बगुले ने कहा कि वह मुझसे छोटी है। उसका जूठन खाकर में उपहास का पात्र बन जाऊँगा । राम ने कहा पति-पत्नी एक ही हैं। बड़ा छोटा कोई नहीं। अन्त में राम ने कहा कि कार्तिक शुक्ल दशमी से पूर्णिमा तक कोई आमिष का सेवन नहीं करेगा। तुम्हारे आदर में इस व्रत का नाम बकपञ्चक रखा जायगा । बाद में कुक्कुट ने भी सहानुभूति व्यक्त करते हुए राम से कहा तुम क्यों रोते हो ? यहाँ अकेले क्यों रहते हो ? राम ने सीताहरण की सब कथा सुना दी और उसे वर दिया कि तुम्हारे सिर पर सप्तशाखा- वाला लाल मुकुट होगा । जो तुमको मारेगा वह मेरा शत्रु होगा। सम्भवतः इसी कारण उड़ीसा में कुक्कुट को राम पक्षी कहा जाता है । असमिया गीतिरामायण में पीपल वृक्ष से सीता का समाचार पूछे जाने का वृत्तान्त मिलता है। सन्ताल, बिहोर और मुण्डा जातियों में सीता की खोज के वर्णन के प्रसंग में बगुले, गिलहरी और बेरवृक्ष की कथाएँ है । किसी वृक्ष की डाल पर गिलहरी रो रही थी। रामने उससे रोने का समाचार पूछा तो उसने कहा कि उन्हीं के लिए तो मैं रो रही हूँ। रावण ने सीता-हरण किया है। राम ने पीठ थपथपाकर वर दिया कि कितनी भी ऊँचाई से गिरने पर तुम्हें चोट न लगेगी । सन्ताली कथा में बेर में चिथड़ा लटका हुआ देखकर राम ने पूछा, बेर ने बताया कि इसी रास्ते से रावण सीता को ले गया। मैंने छुड़ाने का प्रयत्न किया भी, परन्तु मुझे उनकी साड़ी के चिथड़े के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला । राम ने आशीर्वाद दिया तुमको कितना भी काटने पर तुम्हारा कोई भी नाश नहीं कर सकता । इन सब कथाओं का इतना ही सार है कि राम और उनकी कथा बहुत व्यापक है। भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न जातियों में, यहाँ तक कि पशु-पक्षियों में भी उनकी चर्चा रही है। शिवपुराण ( सतीखण्ड अध्याय २४-२६) में सती द्वारा सीता का रूप धारण कर राम की परीक्षा का वृत्तान्त है। रामचरितमानस, भावार्थरामायण ( ३।२० ) तथा आनन्दरामायण ( १।७।१४ ) में इसका विस्तार है । वाल्मीकिरामायण से अविरुद्ध आर्षग्रन्थ पर आधारित यह कथा प्रामाणिक ही है। विरही राम से नारद के मिलने और भक्ति वरदान पाने की कथा रामचरितमानस तथा रामगीतगोविन्द (४।७ ) इस परम्परा की होने से प्रामाणिक ही है। तोरवेरामायण ( ३।२ ) के अनुसार भरत को दुखी होते देखकर जाबालि राम के पास जाते हैं । राम भी भरत का समाचार न मिलने पर चिन्तित थे । जाबालि ने सान्त्वना दी और हरिश्चन्द्र की कथा सुनायी । ४७७ वें अनु० में शबरी की कथा को बुल्के प्रक्षेप मानते हैं। उनके अनुसार आधिकारिक कथावस्तु से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। पर वे यह सिद्धान्त नहीं जानते कि “वस्तुसत्त्वं प्रयोजनं नापेक्षते”—अर्थात् वस्तु-सत्ता प्रयोजन की अपेक्षा नहीं रखती है। कई वस्तुओं का हमसे कुछ प्रयोजन नहीं हैं, पर वे हैं। इसी तरह भले ही कथा का सम्बन्ध न हो तो भी वह अरण्य में राम से मिली । उसका राम से वार्तालाप हुआ । तब महर्षि उसका वर्णन क्यों न करते ? परन्तु प्रकृत प्रसङ्ग में तो जब राम वृक्षों और लताओं से भी सीता का समाचार पूछ रहें हैं तब धर्मचारिणी