भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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५१८ रामायणमीमांसा षोडश में क्यों असमर्थ होओगे । बुल्के कहते हैं इस प्रकार हम देखते हैं कि सम्पाति की कथा धीरे-धीरे अलौकिक घटनाओं के परिवर्धन से विकसित होकर अन्त में भगवान् राम के गुणगान में परिणत हुई । इससे स्पष्ट है, बुल्के इसे वस्तुस्थिति नहीं मानते, किन्तु द्वितीय कथा को भक्तकृत कल्पनामात्र मानते हैं । परन्तु यह उनकी केवल दुरभिसन्धि है, क्योंकि जब आर्ष विज्ञान पर आधारित वाल्मीकिरामायण में सम्पाति की विस्तृत कथा विद्यमान है तब केवल अलौकिक घटनाओं के कारण उसे प्रक्षेप या कल्पनामात्र कैसे कहा जाय ? क्या बाइबिल की कथाओं में अलौकिक घटनाओं के कारण बाइबिल का प्रामाण्य मान्य नहीं है ? ❖