भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( १९ ) सीता की अग्निपरीक्षा ५८३ अयोध्याप्रत्यावर्तन ५८४ लङ्का की सुरक्षा की दृष्टि से सेतुभङ्ग ५८४ वाल्मीकिरामायण आदि महाकाव्य होने के साथ ही आर्य इतिहास भी है ५८५ राम का सबसे मिलना ५८६ भस्मलोचन का विनाश ५८६ अन्यान्य रामायणों के विभिन्न वृत्तान्त ५८६ एकोनविंश अध्याय उत्तरकाण्ड ५९०-६४९ रावण के पूर्वजों एवं रावण का भी वेद में नाम ५९० अथर्ववेद में दशशीर्ष ब्राह्मण का वर्णन ५९० रामाभिषेक के पश्चात् रामाभिनन्दनार्थ आये तपस्वियों द्वारा राक्षस-वंश का इतिवृत्त सुनाना ५९० रावण के भाई और बहन ५९१ रावण जन्मना ब्राह्मण ५९१ राम कथा के विकास के साथ क्षत्रिय रावण ब्राह्मण ही नहीं उत्तरकाण्ड में ब्रह्मा का वंशज हो गया, बुल्के का यह कथन प्रमाद ही है ५९१ वाल्मीकिरामायण के अनुसार रावण ब्रह्मपुत्र पुलस्त्य का पौत्र एवं विश्रवा का पुत्र है ५९१ महाभारत के अनुसार रावण के पूर्वज ५९२ काशीकेदारखण्ड के अनुसार शिवगण भद्र और सुभद्र ही जय-विजय हुए शापवश वे ही हिरण्य- कशिपु और हिरण्याक्ष हुए ५९३ दूसरे जन्म में वे ही रावण ओर कुम्भकर्ण हुए. ५९५ रावण आदि का तप और वरप्राप्ति ८९६ रावण का विवाह तथा सन्तति ५९७ रावण की अन्यान्य विजय-यात्राएँ ५९८ रम्भा-धर्षण के कारण रावण को नलकूवर का शाप ५९९ कार्तवीर्य द्वारा-रावण की पराजय ६०० उत्तरकाण्ड की कथावस्तु ६०१ उत्तरकाण्ड का विश्लेषण ६०२ सौदास की कथा ६०३ शम्बूक-वध ६०७ कार्य और अकार्य के विषय में शास्त्र प्रमाण ६०९ राम का अश्वमेध ६१० राम की यात्राएँ ६११ हनुमच्चरित ६१४