रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २० ) हनुमांन् की कथा ६१४ हनुमान् का जन्म ६१८ हनुमान् का बालचरित ६२० हनुमान् की विद्या, बुद्धिमत्ता तथा पराक्रम ६२४ हनुमान् का ब्रह्मचर्य ६३१ राम द्वारा लोकापवाद की दृष्टि से सीता का त्याग ६४० अवास्तविक सीतात्याग ६४६ राम का सीता के प्रति पूर्ण अनुराग ६४६ कुश-लवचरित ६४६ राम का वैष्णव तेज में प्रवेश ६४७ विंश अध्याय रामचरितसिंहावलोकन ६५०-७२१ विष्णुपरक वेदमन्त्रों की व्याख्या ६५० भगवान् विष्णु के दिव्य जन्म और कर्म का निर्देश ६५३ अवतारवाद एवं सीता और राम का महत्त्व ६५४ मत्स्यावतार, कूर्मावतार तथा बाराहावतार का संकेत ६५४ नृसिंहावतार का सूचन ६५४ वामनावतार, परशुरामावतार, कृष्णावतार का संकेत ६५४ वाराहावतार के सूचक वेदमन्त्र ६५५ वामनावतार के बोधकवेदमन्त्र ६५५ कूर्मावतार के बोधक वेदमन्त्र ६५६ कृष्णावतार के बोधक वेदमन्त्र ६५९ नारसिंहावतार के बोधक वेदमन्त्र ६५९ रामावतार के बोधक वेदमन्त्र, पुराण-वचन आदि ६५९ राम के गुण तथा स्वभाव ६६८ पाश्चात्यों की अवतार आदि के विषय में धारणा ६७२ . उसका समाधान ६७४ राम की ऐतिहासिकता ६७६ श्रीराम की नीति ६७७ श्रीराम की जन्मकुण्डली ६७८ श्रीराम की नीतिमत्ता ६७८ आदर्श रामराज्य ६७९ सत्पुरुषव्रती राम ६८१ सर्वलोकप्रिय राम ६८६ राम-नाम की अपार महिमा ६८९ रामवियोग से सारा पुर ही व्याकुल और संभ्रान्त ६९१