भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( २१ ) वृक्ष, नदियां, सरोवर तक रामवियोग से सन्तप्त ६९१ राम को गङ्गातट पहुँचा कर लौटते हुए रथाश्वों की दशा ६९२ कुश और लव की जन्मकथा ६९३ लक्ष्मण का परित्याग ६९६ रामायण की सुखान्त रामकथा ६९७ उपसंहार ६९९ रामायण का मूल उपनिषद्, ब्रह्मा का वरदान तथा महर्षि वाल्मीकि की समाधिजा ऋतम्भरा प्रज्ञा ७०१ कल्पभेद से कहीं कहीं रामकथा में भेद की प्रतीति ७०२ वाल्मीकिरामायण, आनन्दरामायण तथा पुराणों की मान्यता के अनुसार शतकोटिप्रविस्तर रामायण सब रामकथाओं का मूल ७०३ शतकोटिप्रविस्तर रामकथा का मूल स्रोत वेद ७०३ अवतारवाद और भक्ति दो तत्व कृष्णावतार तथा कृष्णभक्ति के अनुकरण पर ही रामकथा में प्रविष्ट यह कथन भ्रममूलक ७१० ईश्वर होने के कारण कृष्ण के समान ही राम की रामलीला भी वास्तविक, अनुकरण नहीं ७११ वाल्मीकिरामायण, महाभारत, भागवत आदि का प्रामाण्य मानने पर राम और कृष्ण के अस्तित्ववत् सीता, रुक्मिणी आदि की अभिन्नता की सिद्धि ७१२ स्फुट काव्य के आधार पर वाल्मीकि ने रामायण की रचना की, यह कल्पना निराधार एवं वाल्मीकिरामायण के विरुद्ध ७१३ राम का अनादिकाल से ही विष्णु-अवतार के साथ-साथ व्यावहारिक रूप मर्यादापुरुषोत्तम ७१५ रामकथा का मुख्यदृष्टिकोण धार्मिक न होकर शताब्दियों तक साहित्यिक ही रहा, यह कथन असत्य ७१६ भक्तिमार्ग का आविर्भाव वैदिक साहित्य में हो चुका था, वह शताब्दियों के पश्चात् भागवत धर्म में पल्लवित हो सका, यह विकासवाद मिथ्या अपसिद्धान्त में ही सम्भव है ७१७ पुराणों में विष्णु को परब्रह्मरूप माना गया है, विष्णु के अवतार होने से राम सुतरां परब्रह्म ७१७ रावण ने कामबुद्धि से सीताहरण किया यह उसका बाह्यरूप है, आन्तर रूप यह भी है कि उसने मुक्तिकामना से राम से वैर किया ७१८ राम के अवतार के मुख्य प्रयोजन ७१९ बाली द्वारा राम की निर्दोषता स्वीकार ७२० रामकथा भारतीय संस्कृति के आदर्शवाद का उज्ज्वलतम प्रतीक ७२१ एकविंश अध्याय रामचरितसम्बन्धी लेख ७२२-८५० मर्यादापुरुषोत्तम भगवान् राम तथा जगज्जननी जानकी के प्रति वनमानव द्वारा प्रयुक्त अत्यन्त अशोभन, अभद्र शब्दों का उत्तर ७२२ रामचरित के सम्बन्ध में वर्तमान इतिहास का चञ्चुप्रवेश नहीं हो सकता ७२४ सेतुबन्धन कल्पना नहीं ७२५ समुद्रवर्णन तथा दक्षिण भारत की स्थिति ७२६