रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२६ रामायणमीमांसा सप्तदश... करते हैं। पउमचरियं के अनुसार विभीषण ने हनुमान् का स्वागत किया और सीता को लौटाने के लिए रावण से आग्रह करने की प्रतिज्ञा की थी। गुणभद्र के अनुसार हनुमान् दूसरी बार जाकर विभीषण से मिलते हैं। विभीषण रावण को समझाते हैं और हनुमान् को रावण के पास ले जाते हैं। उनके समझाने पर भी वह नहीं मानता, यह सब नवीनता लाने का प्रयत्नमात्र है। तुलसीदास के अनुसार विभीषण के रामनामस्मरण से उसे भक्त जानकर हनुमान् उससे पहिचान करते हैं और राम की महिमा का वर्णन करते हैं— “राम नाम तेहि सुमिरन कीन्हा। हृदय हरषि कपि सज्जन चीन्हा॥ एहि सन हठि करिहउ पहिचानी। साधु ते होइ न कारज हानी॥” (रा० मा० ५।५।२) “प्रात लेइ जो नाम हमारा। तेहि दिन ताहि न मिले अहारा॥” (रा० मा० ५।६।४) “अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर। कीन्ही कृपा सुमिरि गुन भरे विलोचन-नीर॥” (रा० मा० ५।७) तत्त्वसंग्रहरामायण के अनुसार हनुमान् रावण तथा उसकी पत्नियों के सब वस्त्र समेट कर ले गये थे। रामकेर्ति और रामजातक के अनुसार हनुमान् ने रावण तथा मन्दोदरी के बालों को बाँधकर मन्त्र पढ़कर लिख दिया था कि जब मन्दोदरी रावण को थप्पड़ मारेगी तभी यह गाँठ खुलेगी। भावार्थरामायण के अनुसार हनुमान् ने रावण के सामने ही अनेक उत्पात किये थे। रावण की सभा के दीपकों को बुझा दिया था। सीता-रावण-संवाद ५४० वाँ अनु० सीता को लङ्का में न पाकर अशोकवन में प्रवेश कर हनुमान् सीता को देखते हैं। रावण अपनी पत्नियों के साथ दीनतापूर्वक सीता से निवेदन करता है कि वह उसे पति के रूप में स्वीकार कर लें। सीता ने उसके इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर उसको उपदेश दिया कि मुझको राम के पास पहुँचा दे, अन्यथा राम अवश्य उसका वध करेंगे। रावण ने क्रुद्ध होकर दो मास की अवधि दी कि यदि तुम दो महीने में मेरा प्रस्ताव स्वीकार नहीं करोगी तो तुम्हारा शरीर काटकर राक्षस लोग उसे मेरे प्रातः भोजन (कलेवा) के लिए तैयार करेंगे यह कह- कर उसने राक्षसियों को आदेश दिया कि वे सब सीता को वश में लाने का प्रयत्न करती रहें। वाल्मीकिरामायण (५।१८।५) के अनुसार रावण का यह अशोकवन में आगमन कामवासनामूलक ही था। परन्तु अध्यात्मरामायण, आनन्दरामायण, तत्त्वसंग्रहरामायण आदि के अनुसार रावण उत्सुकतापूर्वक राम के आगमन की प्रतीक्षा करता था, क्योंकि उसे विष्णु के हाथों से मरकर मुक्ति प्राप्त करने की अभिलाषा थी। उसी दिन उसने स्वप्न देखा था कि राम का सन्देश लेकर कोई कामरूपी वानर वृक्ष की शाखा पर बैठकर सीता को देख रहा है। स्वप्न की सत्यता की सम्भावना से ही वह वाग्बाणों से सीता को दुःख पहुँचाने के लिए गया, जिससे वानर यह सब देखकर राम को सुनावे और मुझे शीघ्र ही मुक्ति मिल जाय। यह कहा जा चुका है कि वाल्मीकिरामायण में लौकिक ऐतिहासिक वर्णन की प्रधानता होने से उसमें अधिकांश लौकिक ही वर्णन मिलता है; किन्तु अध्यात्मरामायण आदि आध्यात्मिक रहस्यों का भी वर्णन करते हैं। अतः बाह्यरूप से रावण की काममूलक प्रवृत्ति होने पर अन्तरङ्ग अभिरुचि मुक्ति की ही थी। धर्मखण्ड (अ० १०५) के अनुसार रावण सीता को मार डालना चाहता था, किन्तु मन्दोदरी उसे वैसा करने से रोक देती है। हनुमान् प्रकट होकर उसकी छाती पर मुष्टिप्रहार करते हैं। जिससे वह भयभीत होकर भाग जाता है।